क्यों मनाया जाता है ‘ईद मिलाद-उन-नबी’, जानिए इस्लाम में इस त्योहार का महत्व

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सीमा कुमारी

नवभारत डिजिटल टीम: इस्लाम धर्म में ‘ईद-ए-मिलाद’ (EID-E-Milad-Un-Nabi 2023) ख़ास महत्व रखता है। इस्लाम धर्म को मानने वाला हर मुसलमान भाई व बहन इस महीने यानी सितंबर के महीने में पैगंबर मुहम्मद की सालगिरह यानी जन्मदिन को ईद-ए-मिलाद के रुप में मनाता है। इस वर्ष, यह भारत में आज यानी 27 सितंबर को मनाया जा रहा है। ईद मिलाद-उन-नबी एक वार्षिक त्यौहार है जो इस्लाम के संस्थापक पैगंबर मुहम्मद की जयंती का प्रतीक है, जिन्हें मुसलमानों द्वारा ईश्वर का दूत भी माना जाता है।

मुस्लिम धर्मगुरु के अनुसार, ईद-ए-मिलाद का पर्व इस्लाम धर्म में बहुत ही महत्वपूर्ण दिन है। इस दिन को अल्लाह की इबादत का खास मौका माना जाता है। लोग घर और मस्जिदों में पवित्र कुरान पढ़ते है। जुलूस निकालते हैं और दान व जकात करते हैं। नमाज और मोहम्मद साहब के संदेशों को पढ़ने के साथ ही लोगों को दान दिया जाता है। कहते हैं कि इस दिन कुरान के पाठ से अल्लाह का रहम बरसता है। ईद ए मिलाद पैगंबर हजरत मोहम्मद से जुड़ा पर्व है। आइए जानें ईद-ए-मिलाद-उन-नबी के बारे में।

ईद मिलाद-उन-नबी 12वें रबी-उल-अव्वल को मनाया जाता है, जो इस्लामी कैलेंडर का तीसरा महीना है। यह दिन शिया और सुन्नी संप्रदायों द्वारा अलग-अलग दिन मनाया जाता है। सुन्नी विद्वानों ने ईद मिलाद-उन-नबी मनाने के लिए 12वीं रबी-उल-अव्वल को चुना है। जबकि, शिया विद्वान 17वें रबी-अल-अव्वल को उत्सव मनाते हैं।

पैगंबर मुहम्मद की जन्मतिथि को वालिद के नाम से भी जाना जाता है। यह शब्द, जो अरबी से लिया गया है, अंग्रेजी में जन्म के रूप में अनुवादित होता है। ईद मिलाद-उन-नबी मनाने की उत्पत्ति का पता इस्लाम के शुरुआती दिनों से लगाया जा सकता है जब लोग पैगंबर के सम्मान में इकट्ठा होते थे और छंद पढ़ते थे। हदीस में परिलक्षित पैगंबर मुहम्मद के जीवन और उनकी शिक्षाओं ने दुनिया भर में कई लोगों को प्रभावित किया है।

Eid-e-Milad Guidelines

ईद मिलाद-उन-नबी मुस्लिम समुदाय के लोगों के लिए पैगंबर मुहम्मद के जीवन और उनके विचारों को याद करने और उनका सम्मान करने का एक अवसर है। भारत के अलावा, ईद मिलाद-उन-नबी श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम, पाकिस्तान, श्रीलंका, बांग्लादेश, रूस और जर्मनी सहित कई देशों में मनाया जाता है। अधिकांश मुस्लिम-बहुल देशों में, त्योहार को राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मान्यता दी जाती है।

ईद मिलाद-उन-नबी के उत्सव और अनुष्ठानों में आमतौर पर रंगीन कृत्रिम रोशनी के साथ मस्जिदों, सड़कों और आवासीय क्षेत्रों को सुंदर बनाना शामिल होता है। लोग पैगंबर मुहम्मद को याद करते हुए बड़े जुलूस भी निकालते हैं।