जानें ‘शारदीय नवरात्रि’ के 10वें द‍िन ‘इसलिए’ मनाई जाती है ‘व‍िजयदशमी’

    -सीमा कुमारी

    ‘दशहरा’ हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है। हर साल यह त्योहार अश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। नौ द‍िनों तक चलने वाले महापर्व आदिशक्ति मां दुर्गा के पावन पर्व नवरात्रि के बाद दसवें द‍िन आता है ‘व‍िजयदशमी’ का महापर्व। इसे भी बड़ी ही श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया जाता है। लेक‍िन, क्‍या आप जानते हैं क‍ि, ‘शारदीय नवरात्रि’ के दसवें द‍िन ही ‘व‍िजयदशमी’ (Vijayadashami) यानी ‘दशहरा’ (Dussehra) क्‍यों मनाई जाती है? आइए जानें –

    धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने रावण का इस दिन वध किया था। साथ ही ये भी कहा जाता है कि रावण का वध करने से पहले उन्होंने समुद्र तट पर नौ दिनों तक ‘मां दुर्गा’ की आराधना की थी, फिर दसवें दिन उन्हें विजय प्राप्त हुई। एक मान्यता ये भी है कि मां दुर्गा ने नौ रात्रि और दस दिन के युद्ध के बाद राक्षस महिषासुर का वध किया था।

    ‘लंका युद्ध’ में विजय प्राप्ति के लिए ब्रह्माजी ने श्रीराम को चंडी देवी की पूजा का परामर्श दिया था। उन्होंने भगवान श्रीराम से कहा था कि चंडी देवी के पूजन में वह दुर्लभ एक सौ आठ नीलकमल का प्रयोग जरूर करें। वहीं दूसरी ओर रावण ने भी अमरत्व  प्राप्ति के लिए चंडी मां की पूजा के लिए यज्ञ और पाठ का आयोजन किया। 

    रावण को जब पता चला कि भगवान श्रीराम भी चंडी यज्ञ कर रहे हैं तो उसने अपनी माया से भगवान श्रीराम के पूजा में शामिल होने वाले नीलकमल में से एक नीलकमल गायब कर दिया। यह बात जब भगवान श्रीराम को पता चली तो भगवान को याद आया कि उन्हें भी लोग ‘कमलनयन नवकंच लोचन’ कहते हैं और ऐसा स्मरण कर उन्होंने अपने नयन को निकालने के लिए तलवार निकाल ली, तभी माता चंडी वहां प्रकट हुईं और कहा कि वह उनकी भक्ति से बहुत प्रसन्न हैं और उन्हें लंका विजय का आशीर्वाद दे दिया।

    रावण भी मां चंडी देवी को प्रसन्‍न करने के ल‍िए व‍िध‍िवत् उनकी पूजा कर रहा था। लेक‍िन पूजन के दौरान उसने सहस्र चंडी पाठ के प्रथम मंत्र ‘हरिणी’ शब्द को ‘हर‍िणी’ के बजाय ‘कारिणी’ पढ़ा। इसमें ‘ह’ की जगह ‘क’ का उच्चारण करने से मंत्र का अर्थ बदल गया। इससे मां चंडी का यज्ञ सफल नहीं हो पाया और रावण मर्यादा पुरुषोत्‍म के हाथों मृत्‍यु को प्राप्‍त हुआ।

    ज्योतिष-शास्त्र के अनुसार, दशहरा पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है, साथ ही ये पर्व आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को आता है। जिस कारण इसे ‘विजयादशमी’ के नाम से जाना जाता है। पूरे साल में  तीन तिथियों को सबसे ज्यादा शुभ माना गया है। जिसमें से एक तिथि दशहरा की है। अन्य दो हैं चैत्र शुक्ल और कार्तिक शुक्ल की प्रतिपदा तिथि।

    शुभ-मुहूर्त

    15 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 38 मिनट से लेकर 2 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप कोई भी कार्य करके अपनी जीत सुनिश्चित कर सकते हैं।

    अश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि आरंभ

     14 अक्टूबर 2021 को शाम 6 बजकर 52 मिनट से।

     अश्विन मास शुक्ल पक्ष तिथि समाप्त

     15 अक्टूबर 2021 शाम 6 बजकर 2 मिनट पर।