जानें क्या है ‘पकड़ौआ’ विवाह? बिहार में शादी के लिए क्यों लड़कों को कर लिया जाता है अगवा

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नवभारत डिजिटल डेस्क: हर मां-बाप चाहते हैं कि उनके बच्चों (बेटा या बेटी) की शादी किसी अच्छे घर में हो। होने वाली बहु और दामाद दोनों पढ़े लिखे और समझदार हों, इसलिए शादी-ब्याह के दौरान दोनों पक्ष हर कदम फूंक-फूंक कर उठाते हैं। अब तो खुद लड़का-लड़की भी शादी से पहले एक-दूसरे के बारे में सब कुछ जानने के बाद ही अपनी रजामंदी देते हैं। वैसे भी शादी को लेकर कहा गया है कि ये ऐसा लड्डू है जो खाए वो भी पछताए और जो न खाए वो भी पछताए। लेकिन सोचिये आप अपने घर के बाहर खड़े हैं और उसी वक्त कुछ लोग आपके पास आयें और आपको उठाकर ले जाए और किसी अंजान लड़की से शादी करा दें तो क्या कहेंगे। बस इसी को कहते हैं पकड़ौआ विवाह (Pakdaua Vivah), बिहार (Bihar) में इस प्रथा का चलन है। आइए विस्तार में जानें कैसे हुई इसकी शुरुआत (Started) और क्या है ये प्रथा। 

जानें क्या है पकड़ौआ विवाह 
पकड़ौआ विवाह (Pakadua Vivah) में लड़के की मर्जी पूछी नहीं जाती है। लड़का सरकारी नौकरी कर रहा है या उसे नौकरी मिली इसकी भनक लगने के बाद उसके पास कुछ अंजान लोग आते हैं और उसे जबरन अपने साथ लेकर जाते हैं। इस दौरान अगर लड़का विरोध करने की कोशिश करता है तो उसे डराने के लिए मारा-पीटा भी जाता है। उसके बाद उसकी शादी ऐसी लड़की से करा दी जाती है जिसको उसने कभी देखा तक नहीं। शादी के कुछ दिन बीत जाने के बाद लड़के को उसके घर जाने दिया जाता है और वहां पहुंचकर वो अपने परिवार को शादी की बात बताता है। इस तरह की शादी को पकड़ौआ विवाह के नाम से जाना जाता है।  

बिहार में पकड़ौआ विवाह का चलन
रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 1970 और 80 के दशक में बिहार में इस तरह की शादी बड़ी तेजी से कराई जाती थी। बिहार के कुछ ऐसे जिले थे जहां पर लड़कों का जबरन पकड़ौआ विवाह करा दिया जाता था। पकड़ौआ विवाह शादी-ब्याह के सीजन में सबसे अधिक देखा गया। बिहार के जिन जिलों में इसका असर सबसे अधिक था उनमें बेगुसराय, लखीसराय, मुंगेर, मोकामा, जहानाबाद, नवादा का नाम शामिल है। स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की एक रिपोर्ट के  मुताबिक जबरन विवाह के आंकड़े कुछ इस प्रकार हैं।  

पकड़ौआ विवाह
साल 2020 में पकड़ौआ विवाह के मामले – 33
साल 2021 में पकड़ौआ विवाह के मामले- 14

पटना हाई कोर्ट ने कहा
पटना हाई कोर्ट के जस्टिस पीबी बज्रन्थी और जस्टिस अरुण कुमार झा ने एक 10 साल पुराने मामले पर अपना फैसला सुनाया था। जिसमें उन्होंने पकड़ौआ विवाह की मान्यता को खारिज करते हुए कहा, “शादी के लिए जब तक लड़का-लड़की की रजामंदी नहीं होगी तब तक शादी को सही नहीं ठहराया जाएगा।”  

कैसे सुर्खियों में आया फिर से पकड़ौआ विवाह
दरअसल, बिहार के रेपुरा के उत्क्रमित मध्य विद्यालय में गौतम नाम के युवक ने BPSC की परीक्षा पास करने के बाद शिक्षक के रूप में नौकरी ज्वाइन की थी। रोज की तरह जब गौतम स्कूल में पढ़ाने पहुंचे तो अचानक कुछ लोग वहां पर आ धमके और वो गौतम को जबरन उठाकर अपने साथ ले गए।  जिस जगह गौतम को ले जाया गया वहां पर पहले से ही मंडप तैयार था। उन्होंने गौतम की शादी बंदूक की नोंक पर जबरन एक लड़की से करा दी। जिसके बाद इस घटना को लेकर सूबे में पकड़ौआ विवाह की चर्चा तेजी से होने लगी।