आ रही है ‘नवरात्रि’, जानें कब है ‘दशहरा’ और इस त्योहार का शुभ मुहूर्त और पूजा-विधि

    सीमा कुमारी

    नई दिल्ली : ‘दशहरा’ का त्योहार हर साल आश्विन महीने  के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल दशहरा का महापर्व 15 अक्टूबर, शुक्रवार को मनाया जाएगा। दशहरा या विजयादशमी (Vijay dashmi ) हर साल बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है। हिंदू धर्म में दशहरा के पर्व का विशेष महत्व है।

    मान्यता है कि, इस दिन भगवान राम ने अहंकारी रावण का वध कर धरती को उसके प्रकोप से बचाया था। यह राक्षस महिषादुर पर देवी दुर्गा की विजय के जश्न के रूप में भी मनाया जाता है। दशहरा का पर्व अवगुणों को त्याग कर श्रेष्ठ गुणों को अपनाने के लिए प्रेरित करता है। इसी कारण इस पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना गया है।

    कब से है ‘नवरात्रि’

    नवरात्रि की शुरुआत 7 अक्टूबर को होगी और महानवमी (Maha Navami) 14 अक्टूबर को होगी। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। इसके अगले दिन दशहरा मनाया जाता है। इस दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का संहार भी किया था, इसलिए इसे ‘विजयदशमी’ (Vijaya Dashami) के रूप में भी मनाया जाता है।

    शुभ मुहूर्त :

    अश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि आरंभ-

    14 अक्टूबर 2021 को शाम 6 बजकर 52 से

     अश्विन मास शुक्ल पक्ष दशमी तिथि समाप्त-

    15 अक्टूबर 2021 शाम 06 बजकर 02 मिनट पर

    पूजन का समय-

    15 अक्टूबर दोपहर 02 बजकर 02 मिनट से लेकर दोपहर 2 बजकर 48 मिनट तक 

    दशहरा की शस्त्र पूजन की विधि

    इस दिन विजय मुहूर्त में पूजा करना बहुत शुभ माना जाता है। मान्यताओं के मुताबिक, भगवान श्रीराम ने रावण को हराने के लिए इसी मुहुर्त में युद्ध का प्रारंभ किया था। क्षत्रिय एवं योद्धा इस दिन अपने शस्त्रों की पूजा करते हैं। प्रात: काल उठकर परिवार के सभी सदस्यों को स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।

    सभी शस्त्रों को पूजा के लिए निकाल कर साफ कर लें। इन पर गंगाजल छिड़कर पवित्र करें। सभी शस्त्रों पर हल्दी या कुमकुम का तिलक लगाकर पुष्प अर्पित करें। इस दिन महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा करनी चाहिए। इससे सम्पूर्ण बाधाओं का नाश होगा और जीवन में विजय श्री प्राप्त होगी। नवग्रहों को नियंत्रित करने के लिए भी दशहरे की पूजा अद्भुत मानी जाती है।

    दशहरा का महत्व

    इस दिन भगवान श्री राम ने रावण का वध कर लंका पर विजय प्राप्त की थी। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। लोग अलग-अलग तरह से दशहरा मनाते हैं। सनातन धर्म में प्राचीन समय से ही शस्त्र पूजन की परंपरा चली आ रही है। इस दिन लोग शस्त्र पूजन और वाहन पूजन भी करतें हैं। इसके अलावा कुछ लोग इस दिन नया कार्य भी आरंभ करते हैं, क्योंकि नए कार्य का आरंभ करने के लिए यह दिन बहुत शुभ माना जाता है।