Shani Pradosh Vrat 2024
शनि प्रदोष व्रत 2024 (Social Media)

Loading

सीमा कुमारी

नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क:देवों के देव महादेव को समर्पित ‘प्रदोष व्रत'(Pradosh Vrat) हर माह कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर रखा जाता है। सनातन धर्म में इस व्रत का बड़ा महत्व है। इस बार चैत्र माह (chaitra month 2024) का ‘प्रदोष व्रत'(Pradosh Vrat 2024) 6 अप्रैल शनिवार के दिन है। शनिवार के दिन पड़ने के चलते यह शनि प्रदोष (Shani Pradosh Vrat 2024) कहलाएगा।

धार्मिक मत है कि शनि प्रदोष व्रत करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। साथ ही नवविवाहित साधक को पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। आइए जानें शनि प्रदोष का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और इसकी महिमा।

शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों की मानें तो चैत्र कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि अप्रैल 6 को सुबह 10 बजकर 19 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन यानी 7 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 53 मिनट पर समाप्त होगी। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा की जाती है। अतः 6 अप्रैल को ही शनि प्रदोष व्रत मनाया जाएगा। इस दिन प्रदोष काल यानी पूजा का समय संध्याकाल 6 बजकर 42 मिनट से लेकर रात 8 बजकर 58 मिनट तक है। इस दौरान साधक अपने आराध्य की पूजा-उपासना कर सकते हैं।

पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करें। अपने पूजा कक्ष को साफ करें।

एक वेदी पर भगवान शिव और देवी पार्वती की प्रतिमा स्थापित करें।

पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं। सफेद चंदन, कुमकुम का तिलक लगाएं।

देसी घी का दीपक जलाएं।

फल, मिठाई और खीर का भोग लगाएं। शिव चालीसा, शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।

अंत में आरती से पूजा को समाप्त करें।

प्रदोष पूजा हमेशा शाम के समय की जाती है, इसलिए शाम के समय पूजा जरूर करें।

पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं और भगवान शनिदेव का आशीर्वाद लें।

पूजा समाप्त करने के बाद सात्विक भोजन से अपना व्रत खोलें।

गरीबों की मदद करें।

महिमा

शनि प्रदोष व्रत का हिंदुओं में बहुत महत्व है, क्योंकि शनिदेव भगवान शिव के परम भक्त थे और प्रदोष व्रत का यह संयोजन पवित्र और विशेष है, जो लोग शनि दोष से पीड़ित हैं, उन्हें इसके बुरे प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए इस शनि प्रदोष व्रत का पालन अवश्य करना चाहिए। साथ ही भगवान शिव के साथ-साथ भगवान शनिदेव की भी पूजा करनी चाहिए और आशीर्वाद लेना चाहिए।