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    -सीमा कुमारी

    हिंदू धर्म में ‘शारदीय नवरात्रि’ (Shardiya Navratri) का बड़ा महत्व है। इस साल ‘शारदीय नवरात्रि’ 7 अक्टूबर से शुरू हो रही है, और दशमी तिथि 15 अक्टूबर को समाप्त होगी। ‘नवरात्रि’ का महापर्व मां दुर्गा की पूजा व उपासना का पर्व है। माता रानी के भक्तों को शारदीय नवरात्रि का इंतजार है। नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना की जाती है। ‘नवरात्रि’ में कलश स्थापना का भी विशेष महत्व होता है।

    मान्यता है कि ‘नवरात्रि’ के दौरान मां दुर्गा की पूजा करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और माता रानी की कृपा से सभी दुख दूर हो जाते हैं। मां दुर्गा के हर वाहन का अपना अलग-अलग महत्व होता है। ‘नवरात्रि’ में इस बार मां दुर्गा किस पर सवार होकर आएंगी। आइए जानें इस बारे में…

    ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, इस साल मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आएंगी। देवी भागवत पुराण के  अनुसार, ‘नवरात्रि’ की शुरुआत सोमवार या रविवार से होती है, तो इसका अर्थ है कि माता हाथी पर सवार होकर आएंगी। शनिवार और मंगलवार को माता अश्व पर सवार होकर आती हैं। जब नवरात्रि गुरुवार या शुक्रवार से प्रारंभ होती हैं, तो इसका अर्थ है कि माता डोली पर सवार होकर आएंगी। इस साल नवरात्रि गुरुवार से प्रारंभ हो रही  है।

    मां दुर्गा की सवारी का महत्व-

    मां दुर्गा (Maa Durga) के हर वाहन का अपना अलग-अलग महत्व होता है। शास्त्रों में ऐसा वर्णन है कि जब मां दुर्गा डोली पर सवार होकर आती हैं, तो राजनैतिक उथल-पुथल की स्थिति बनती है। ये प्रभाव सिर्फ भारत नहीं, बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। ये प्राकृतिक आपदाएं  (Natural disasters) आने का भी संकेत होता है। महामारी फैलती है और लोगों के बीमार होने की संभावना बढ़ जाती है।

    माता का डोली पर आना बहुत ज्यादा शुभ संकेत नहीं माना जाता है। लेकिन, जो भक्त सच्चे मन से मां दुर्गा की आराधना करते हैं, उन पर ये अशुभ प्रभाव नहीं पड़ता है। नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना से मां की कृपा भक्तों पर बनी रहती है।