Sankashti Chaturthi

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सीमा कुमारी

नई दिल्ली: ‘संकष्टी चतुर्थी’ (Sankashti Chaturthi 2023) हिन्दू धर्म का एक प्रसिद्ध त्यौहार है। शास्त्रों के अनुसार, किसी भी शुभ कार्य को करने से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है भगवान गणेश को अन्य सभी देवी-देवतों में प्रथम पूजनीय माना गया है।  इन्हें बुद्धि, बल और विवेक का देवता कहा जाता है। इस बार ‘हेरंब संकष्टी चतुर्थी’ 3 सितंबर रविवार को है। पंचांग के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को ‘हेरंब संकष्टी चतुर्थी’ मनाई जाती है।

इस दिन विधि विधान से भगवान गणेश की पूजा-उपासना की जाती है। साथ ही उनके निमित्त व्रत उपवास भी रखा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि, भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और खुशहाली का आगमन होता है। साथ ही, आय और सौभाग्य में वृद्धि होती है। आइए जानें ‘हेरंब संकष्टी चतुर्थी’ की तिथि, पूजा विधि और चंद्र दर्शन समय-

शुभ मुहूर्त

ज्योतिषियों की मानें तो संकष्टी चतुर्थी 2 सितंबर को संध्याकाल में 8 बजकर 49 मिनट से शुरू होकर अगले दिन यानी 3 सितंबर को संध्याकाल में 6 बजकर 24 मिनट पर समाप्त होगी। सनातन धर्म में उदया तिथि मान है। अत: 3 सिंतबर को हेरंब संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी। ‘हेरंब संकष्टी चतुर्थी’ पर चंद्र दर्शन का समय संध्याकाल 08 बजकर 57 मिनट है।

पूजा विधि

संकष्टी चतुर्थी पर ब्रह्म बेला में उठें और सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान कर उन्हें प्रणाम करें। इसके पश्चात, घर की साफ-सफाई करें। दैनिक कार्यों से निवृत होने के बाद गंगाजल युक्त पानी से स्नान करें। इस समय आचमन कर अपने आप को शुद्ध करें और पीले रंग के वस्त्र धारण करें। अब सबसे पहले भगवान भास्कर को जल का अर्ध्य दें। इसके बाद निम्न मंत्र का उच्चारण कर गणपति जी का आह्वान करें-

वक्र तुंड महाकाय, सूर्य कोटि समप्रभ:।

निर्विघ्नं कुरु मे देव शुभ कार्येषु सर्वदा॥

अब फल, फूल, धूप-दीप, दूर्वा, चंदन आदि से भगवान गणेश की विधिपूर्वक पूजा करें। भगवान गणेश को पीला पुष्प, दूर्वा और मोदक अति प्रिय है। अतः पूजा में उन्हें पीले पुष्प, दूर्वा और मोदक अवश्य भेंट करें। पूजा के समय गणेश चालीसा का पाठ और मंत्र जाप अवश्य करें। अंत में आरती और प्रदक्षिणा कर भगवान गणेश से सुख, शांति और धन प्राप्ति की कामना करें। दिन भर उपवास रखें। शाम में आरती-अर्चना के बाद फलाहार करें।

महिमा

भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को हेरंब संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है।  यह दिन मुख्य रूप से भगवान गणेश की आराधना के लिए समर्पित है। साथ ही इस दिन चंद्र देव की पूजा का भी विशेष महत्व है। इस दिन पूरे श्रद्धा भाव के साथ व्रत करने से व्यक्ति के जीवन में आ रहे सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। साथ ही बल एवं बुद्धि का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस व्रत को करने से कई प्रकार के ग्रह दोष से भी मुक्ति प्राप्त हो जाती है।