आज उगते सूरज को दिया जाएगा ‘अर्घ्य’, संपन्न होगी छठ पूजा

    -सीमा कुमारी

    सूर्योपासना के महापर्व ‘छठ पूजा’ को देशभर में भक्तिमय माहौल से मनाया जाता है। छठ एक पर्व नहीं, बल्कि आस्था का महापर्व भी है। छठ के पावन पर्व में आस्था का सैलाब सा उमड़ पड़ता है। हर तरफ एक अलग ही उल्लास होता है। छठ व्रत में मुख्य रूप से सूर्य और छठी मईया की पूजा -आराधना की जाती है।

    यह व्रत परिवार में सुख-शांति, समृद्धि, संतान प्राप्ति व संतान की दीर्घायु की कामना के लिए किया जाता है। कल यानी, 11 नवंबर, गुरुवार की सुबह उगते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देने के साथ ही छठ पूजा का समापन हो जाएगा। मान्यताओं के मुताबिक, अर्घ्य देने से पहले बांस की टोकरी को फलों, ठेकुआ, चावल के लड्डू और पूजा के सामान से सजाया जाता है। आइए जानें अरुणोदय को अर्घ्य देने का शुभ मुहर्त:

    उगते सूरज को अर्घ्य देने का शुभ -मुहर्त  

    11 नवंबर सूर्योदय- 06:41:15 छठ पर्व समापन अर्घ्य

    छठ के अंतिम अर्घ्य के लाभ

    इससे संतान सम्बन्धी समस्याएं दूर होती हैं। इससे नाम यश बढ़ता है। अपयश के योग भंग होते हैं। पिता पुत्र के संबंध ठीक होते हैं। इसके अलावा, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य कमजोर होता है, उनमें आत्मविश्वास की कमी होती है। सूर्य को अर्घ्य देने से आत्मविश्वास बढ़ता है।

    सूर्य प्रकाश का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है और प्रकाश को सनातन धर्म में सकारात्मक भावों का प्रतीक माना गया है। हर दिन सूर्य को अर्घ्य देने से व्यक्ति की कुंडली में यदि शनि की बुरी दृष्टि हो तो उसका प्रभाव भी कम होता है। इससे करियर में भी लाभ मिलता है।