Sankashti Chaturthi
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2024 (सोशल मीडिया)

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सीमा कुमारी

नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का बड़ा महत्व है। हर माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी मनाई जाती है। इस बार फाल्गुन महीने की ‘संकष्टी चतुर्थी’ (Sankashti Chaturthi 2024) यानी द्विजप्रिय संकष्टी 28 फरवरी, बुधवार के दिन रखा जाएगा। इस शुभ अवसर पर भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही शुभ कार्यो में सिद्धि प्राप्ति के लिए व्रत भी किया जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से साधक को शुभ फल की प्राप्ति होती है और गणपति बप्पा की कृपा सदैव बनी रहती है।

ऐसे आइए जानें द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि-  

शुभ मुहूर्त

चतुर्थी तिथि के दिन भगवान गणेश जी की विधिपूर्वक पूजा और व्रत करने का विधान है। फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का आरंभ 28 फरवरी को रात 1 बजकर 53 मिनट पर होगा और इसके अगले दिन यानी 29 फरवरी को सुबह 4 बजकर 18 मिनट पर तिथि का समापन होगा। ऐसे में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 28 फरवरी, बुधवार के दिन किया जाएगा।

पूजा विधि

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन ब्रह्म बेला में उठें। दिन की शुरुआत भगवान गणेश के ध्यान से करें। इसके बाद स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें। मंदिर की सफाई कर गंगाजल छिड़ककर मंदिर को शुद्ध करें। माना जाता है कि ऐसा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अब चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाकर भगवान गणेश की प्रतिमा को स्थापित करें।

अगले दिन कर सकते है पारण

इसके बाद उन्हें पंचामृत, रोली, अक्षत, जनेऊ, सिंदूर, कुश, दूर्वा, सुपारी इत्यादि अर्पित करें। अब दीपक जलाकर आरती करें और गणेश चालीसा का पाठ करें। इसके पश्चात भगवान गणेश से सुख, समृद्धि और आय में वृद्धि की प्रार्थना करें। इस दिनभर व्रत रखें। संध्याकाल में आरती कर फलाहार करें। अगले दिन पूजा-पाठ कर व्रत का पारण करें।