आज है ज्येष्ठा गौरी पूजन, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और विसर्जन की तिथि

    नई दिल्ली : बप्पा का आगमन होते ही हर तरफ खुशहाली छा जाती है। गणेश उत्सव के दौरान महाराष्ट्र में और एक उत्सव मनाया जाता है और वो उत्सव है ज्येष्ठ गौरी आवाहन (Jyeshta Gauri) । इस साल ज्येष्ठा गौरी का पावन पर्व 12 सितंबर से 14 सितंबर तक है। महाराष्ट्र में ज्येष्ठ गौरी (Jyeshta Gauri) को बेहद पावन दिन माना जाता है। इस त्यौहार के खास तीन महत्वपूर्ण भाग होते भाग होते है। जानते है ज्येष्ठ गौरी पूजन से जुड़ी खास बातें…. 

    सबसे पहले ज्येष्ठ गौरी आवाहन होता है। इसमें देवी ज्येष्ठ गौरी माता की स्थापना की जाती है इसके बाद होती है ज्येष्ठ गौरी पूजन, इसमें माता गौरी को श्रृंगार चढ़ाया जाता है। साथ ही विभिन्न तरह के अलग-अलग भोग चढ़ाये जाते है। इसके दूसरे दिन होता है ज्येष्ठ गौरी विसर्जन। ज्येष्ठ गौरी आवाहन को गौरी पूजा के नाम से भी जाना जाता है। 

    ज्येष्ठा गौरी पूजन का शुभ मुहूर्त :

    ज्येष्ठा गौरी आह्वान तिथि- 12 सितंबर 2021

    शुभ मुहूर्त- सुबह 09:50 बजे से शाम 06:44 बजे तक। 

    ज्येष्ठा गौरी पूजन तिथि- 13 सितंबर 2021

    पूजा शुभ मुहूर्त- सुबह 08:24 बजे से शाम 06:43 बजे तक। 

    कुल अवधि- 10 घंटे 19 मिनट तक। 

    ज्येष्ठा गौरी विसर्जन- 14 सितंबर 2021

    गौरी विसर्जन मुहूर्त- सुबह 07:05 बजे से शाम 06:42 बजे तक। 

    कुल अवधि- 11 घंटे, 37 मिनट तक। 

    ज्येष्ठा गौरी पूजन विधि :

    1. ज्येष्ठा गौरी पूजन में सबसे पहले पंचामृत और शुद्ध जल से देवी की प्रतिमा का अभिषेक किया जाता है। 

    2. अभिषेक हो जाने के बाद एक चौकी पर स्वच्छ वस्त्र बिछाकर ज्येष्ठा गौरी की प्रतिमा को स्थापित करें। 

    3. माता की प्रतिमा को स्थापित करने के बाद माता को साड़ी पहनाएं और सोलह श्रृंगार करें। 

    4. माता ज्येष्ठा गौरी हल्दी-कुमकुम, अक्षत लगाए और प्रणाम करें। 

    5. साथ ही अपनी शक्ति अनुसार उनके प्रिय पकवान बनाकर भोग लगाएं।  

    6. इसके बाद ज्येष्ठा गौरी की कथा पढ़े, और आरती करें।