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    -सीमा कुमारी

    आज यानी 28 मई को मासिक शिवरात्रि (Masik Shivratri) का पावन पर्व  है। पंचांग के अनुसार, हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन को ‘मासिक शिवरात्रि’ मनाई जाती है। यह पर्व न केवल उपासक को अपनी इंद्रियों को नियंत्रित करने में मदद करता है, बल्कि उसे क्रोध, ईर्ष्या, अभिमान और लालच जैसी भावनाओं को रोकने में भी मदद करता है। मासिक शिवरात्रि हर महीने मनाई जाती है। शास्त्रों के अनुसार साप्ताहिक त्योहारों में भगवान शिव को सोमवार का दिन समर्पित किया गया है।

    ‘मासिक शिवरात्रि’ की पूजा रात्रि में ही करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है। भगवान शिव शुभ अशुभ कर्मों का फल प्रदान करते हैं। आदिदेव महादेव शंकर की उपासना करने से लोगों को हर तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। इसलिए प्रत्येक माह में शिवरात्रि के दिन शिव की पूजा करने से विशेष लाभ प्राप्त होता है।

    पूजा-विधि

    • सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें।
    • स्नान करने के बाद साफ- स्वच्छ वस्त्र पहन लें।
    • घर के मंदिर में दीप प्रज्वलित करें।
    • अगर संभव है तो व्रत करें।
    • भगवान भोलेनाथ का गंगा जल से अभिषेक करें।
    • भगवान भोलेनाथ को पुष्प अर्पित करें।
    • इस दिन भोलेनाथ के साथ ही माता पार्वती और भगवान गणेश की पूजा भी करें। किसी भी शुभ कार्य से पहले भगवान गणेश की पूजा की जाती है।
    • भगवान शिव को भोग लगाएं। इस बात का ध्यान रखें भगवान को सिर्फ सात्विक चीजों का भोग लगाया जाता है।
    • भगवान शिव की आरती करें।
    • इस दिन भगवान का अधिक से अधिक ध्यान करें।

    महिमा

    शिवरात्रि के व्रत की महिमा से तो सभी भली-भांति परिचित हैं, लेकिन हर महीने आने वाली मासिक शिवरात्रि का व्रत भी बहुत ही प्रभावशाली माना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि मासिक शिवरात्रि में व्रत, उपवास रखने और भगवान शिव की सच्चे मन से आराधना करने से सभी मनोमनाएं पूरी होती हैं। इस दिन व्रत करने से हर मुश्किल कार्य आसान हो जाता है और जातक की सारी समस्याएं दूर होती हैं। 

    मासिक शिवरात्रि के दिन की महिमा के बारे में यह भी कहा जाता है कि वो कन्याएं जो मनोवांछित वर पाना चाहती हैं इस व्रत को करने के बाद उन्हें उनकी इच्छा अनुसार वर मिलता है और उनके विवाह में आ रही रुकावटें दूर हो जाती हैं। शिव पुराण के अनुसार जो भी सच्चे मन से इस व्रत को करता है उसकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।