Vinayak Chaturthi

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सीमा कुमारी- 

9 अप्रैल 2023 रविवार को वैशाख महीने की संकष्टी चतुर्थी (Sankashti Chaturthi) है। हर माह में आने वाली चतुर्थी का अपना ही अलग महत्व होता है। ऐसे में हर माह में दो चतुर्थी तिथि आती है। एक कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में। सनातन धर्म में संकष्टी चतुर्थी का बड़ा महत्व है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो व्यक्ति ये व्रत करता है उसे भगवान गणेश का महा वरदान अवश्य प्राप्त होता है। इतना ही नहीं इस व्रत को करने से व्यक्ति की मनचाही मनोकामना पूर्ण होती है। इस दिन श्री गणेश जी के साथ चंद्रमा की पूजा का भी विधान बताया गया है।

मान्यता है कि ‘संकष्टी चतुर्थी’ पर भगवान गणेश के 12 नामों का स्मरण करने से व्यक्ति के सारे दुख दूर हो जाते हैं। भगवान गणेश के ये 12 नाम हैं सुमुख, एकदंत, कपिल, गजकर्णक, लंबोदर, विकट, विघ्न नाशक, विनायक, धूम्रकेतु, गणाध्यक्ष, भालचंद्र और गजानन। आइए जानें वैशाख महीने की संकष्टी चतुर्थी की तिथि पूजा विधि और महिमा –

तिथि

कृष्ण पक्ष चतुर्थी

चतुर्थी तिथि प्रारंभ : 9 अप्रैल 2023 को सुबह 9:35 बजे

चतुर्थी तिथि समाप्त : 10 अप्रैल 2023 को सुबह 8:37 बजे

पूजा विधि

‘संकष्टी चतुर्थी’ के दिन सबसे पहले स्नान आदि करके साफ कपड़े पहनें। इस दिन लाल वस्त्र पहनकर पूजा करना शुभ माना जाता है। पूजा करते समय मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें। साफ आसन या चौकी पर भगवान श्री गणेश की मूर्ति विराजित करें। धूप-दीप से भगवान गणेश की पूजा-अर्चना करें। पूजा के दौरान ॐ गणेशाय नमः या ॐ गं गणपतये नमः मंत्रों का जाप करें। पूजा के बाद लड्डू या तिल से बने मिष्ठान का भोग लगाएं। शाम को व्रत कथा पढ़कर और चांद को अर्घ्य देकर व्रत खोलें। व्रत पूरा करने के बाद दान करना न भूलें।

धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान गणेश को मोदक बहुत पसंद हैं। एकदन्त संकष्टी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाना चाहिए। इसके साथ ही उन्हें दूर्वा अर्पित करनी चाहिए। ऐसा करने से प्रभु जल्दी प्रसन्न होते हैं।