Vinayak Chaturthi
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    -सीमा कुमारी

    सनातन धर्म में कोई भी शुभ कार्य शुरू करने से पहले भगवान श्री गणेश जी की पूजा की जाती है। साथ ही हर महीने पड़ने वाले ‘संकष्टी चतुर्थी’ और ‘विनायक चतुर्थी’ पर भी गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है। आषाढ़ माह की ‘विनायक चतुर्थी’ आज, 03 जुलाई को है। आइए जानें पूजा-विधि और इसकी महिमा।

    सनातन पंचाग के अनुसार, हर महीने दो चतुर्थी तिथि पड़ती है। कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को ‘संकष्टी चतुर्थी’ के नाम से तो शुक्ल पक्ष में पड़ने वाली चतुर्थी को ‘विनायक चतुर्थी’ के नाम से जानते हैं। चतुर्थी तिथि पर गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है।

    मान्यता है कि जो लोग विनायक चतुर्थी के दिन व्रत रख कर विघ्नहर्ता भगवान गणेश की पूजा करते हैं, उनके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है और उसकी सारी मनोकामना पूर्ण हो जाती है। यही नहीं, इस दिन गणनायक की पूजा करने से सुख-समृद्धि के साथ सुबुद्दि की प्राप्ति होती है। इस आषाढ़ माह का शुक्ल पक्ष शुरू हो गया है।

    ‘विनायक चतुर्थी’ शुभ मुहूर्त

    आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 02 जुलाई दिन शनिवार को दोपहर 03 बजकर 16 मिनट से हो रहा है। चतुर्थी तिथि का समापन 03 जुलाई रविवार को शाम 05 बजकर 06 मिनट पर होगा। इस दौरान गणेश पूजा का शुभ मुहूर्त 03 जुलाई को सुबह 08 बजकर 54 मिनट से लेकर रात्रि 10 बजकर 33 मिनट तक रहेगा। इस बीच आप दोपहर छोड़ कभी भी गणपति जी की पूजा कर सकते हैं।

    पूजा-विधि

    ‘विनायक चतुर्थी’ के दिन प्रातः काल नित्य क्रिया-कर्म के बाद घर के पूजा स्थल या मंदिर में गणेश जी की पूजा करें और साफ सूथरा वस्त्र पहनकर घर के पूजा स्थल पर बैठ जाएं। पहले दैनिक पूजा कर लें। इसके पश्चात विनायक चतुर्थी पूजा के शुभ मुहूर्त के अनुसार आसन पर बैठ जाएं और भगवान गणेश को लाल फूल, अक्षत्, चंदन, धूप, दीप, इत्र, जनेऊ आदि अर्पित करें. इसके बाद गणेशी जी की प्रतिमा पर दुर्वा और फल मेवा चढ़ाएं।

    ‘विनायक चतुर्थी’ के दिन समय गणेश जी को लाल रंग के सिंदूर का तिलक लगाएं। सिंदूर चढ़ाते समय मंत्र-

    “सिन्दूरं शोभनं रक्तं सौभाग्यं सुखवर्धनम्। शुभदं कामदं चैव सिन्दूरं प्रतिगृह्यताम्॥”

    का जाप करें। साथ में भगवान गणेश जी को लड्ड़ू का भोग लगाएं। इसके बाद विनायक चतुर्थी का पाठ करें और संकटनाशक गणेश स्त्रोत का पाठ करें। पूजा संपन्न होने के बाद भोग लगाए प्रसाद को ब्राह्मण या गरीबों में बांट दें। ऐसा करने से गणेश जी की कृपा प्राप्त होती है और आपके जीवन में कभी कोई संकट नहीं आता है।