पितृपक्ष के दौरान लोहे के बर्तन का करते हैं इस्तेमाल ? जानिए इसके नुकसान

    -सीमा कुमारी

    ‘पितृपक्ष’ (Pitru Paksha) बीते सोमवार से शुरू हो गया है और यह 06 अक्टूबर तक चलेगा। हिन्दू धर्म में इन दिनों का विशेष महत्व होता है। ‘पितृपक्ष’ पर पितरों की मुक्ति के लिए कर्म किए जाते हैं। एक पक्ष तक चलने वाले इस श्राद्ध पक्ष में पितरों का तर्पण विधि-विधान से किया जाता है। ‘श्राद्ध’ का अर्थ श्रद्धा पूर्वक अपने पितरों को प्रसन्न करना। पितृपक्ष के दौरान 16 दिनों तक पितरों को याद किया जाता है।

    कहते हैं, ‘पितृपक्ष’ के दौरान पितर धरती पर अपने वंशजों से मिलने आते हैं और उन्हें आर्शीवाद देकर जाते हैं। ऐसे में वंशज भी अपने पितरों के लिए तर्पण, दान और पिंडदान कर्म, श्राद्ध और पूजा आदि करते हैं। इस साल ‘पितृपक्ष’ 16 दिनों तक चलेगा। इस दौरान पितरों को संतुष्ट करने से लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना बहुत जरूरी होता है। आइए जानें इस बारे में –

    ज्योतिष-शास्त्र के मुताबिक, श्राद्ध-कर्म के दौरान लोहे का बर्तन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। मान्यता है कि ‘पितृपक्ष’ में लोहे के बर्तन इस्तेमाल करने से परिवार पर अशुभ प्रभाव पड़ता है। इस दौरान पीतल, तांबा या अन्य धातु से बने बर्तनों का इस्तेमाल करना चाहिए।

    कहते हैं कि, इस दौरान घर पर सात्विक भोजन बनाना सबसे उत्तम होता है। अगर आपको पितरों की मृत्यु तिथि याद है तो पिंडदान भी अवश्य करना चाहिए। ‘पितृपक्ष’ के आखिरी दिन पिंडदान और तर्पण करना चाहिए।

    शास्त्रों के अनुसार,  देवताओं की पूजा सुबह के समय की जाती है। वहीं, पितृगणों की पूजा दोपहर में की जानी चाहिए। पितृगणों को संतुष्ट करने के लिए ब्राह्मणों को जो भोजन करवाया जाता है, वह दोपहर के समय करवाना चाहिए। इसके साथ ही पितृगणों को दान किया गया भोजन गाय, कौआ, कुत्ते आदि को भी जरूर खिलाना चाहिए।

    ‘पितृपक्ष’ में हो सके तो दाढ़ी और बाल नहीं कटवाने चाहिए। इस दौरान सात्विक जीवन जीना चाहिए और तेल लेपन भी नहीं करना चाहिए। इसके अलावा इस दौरान इत्र और सौंदर्य वर्धक साधनों का प्रयोग भी नहीं करना चाहिए।

    ज्योतिषों का मानना है कि, ‘पितृपक्ष’ में किसी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। और,  किसी तरह की नई चीज खरीदना भी नहीं चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान अपने पूर्वजों को याद करते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए पूजा करते हैं। ऐसे में इस दौरान किसी तरह का कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए।