दुर्गाष्टमी पर करें ‘महागौरी’ की पूजा, जानें सही मुहूर्त और शुभ योग

    -सीमा कुमारी

    शक्ति की आराधना का महापर्व ‘नवरात्रि’ (Navratri 2021) हिन्दू श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।  मान्यताओं के मुताबिक, ‘नवरात्रि’ के पावन नौ दिनों तक मां दुर्गा धरती पर विचरण करती हैं और हर कदम पर अपने भक्तों की विपत्ति से रक्षा करती हैं। माना जाता है कि इन दिनों में नियम और निष्ठा के साथ मां आदिशक्ति के नौ स्वरूपों का पूजन करने से मनुष्य के सभी कष्ट दूर होते हैं और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।

    ‘नवरात्रि’ (Navratri 2021) के नौ दिनों के दौरान पड़ने वाली  सप्तमी, अष्टमी और नवमी पर विशेष पूजा -अर्चना की जाती है। हालांकि, जिस घर में जैसी परंपरा होती है  उसके अनुसार पूजा की जाती है। मसलन, अधिकतर घरों में अष्टमी को विशेष पूजन होता है। नवमी को कन्या भोज होता है और इसी दिन विसर्जन भी होता है। आइए जानें ‘महाष्टमी’ पूजा का शुभ मुहूर्त-

    शुभ मुहूर्त

    इस वर्ष अष्टमी तिथि 13 अक्टूबर 2021 दिन बुधवार को पड़ रही है। इस दिन ‘महगौरी माता’ (Mahagauri Mata Puja) का पूजन किया जाएगा।

    अष्टमी तिथि आरंभ- 12 अक्टूबर 2021 को रात 09 बजकर 47 मिनट से और

    अष्टमी तिथि समाप्त- 13 अक्टूबर 2021 को रात 08 बजकर 07 मिनट पर होगी।

    ऐसे करें ‘महागौरी’ की पूजा

    इस दिन प्रातः स्नानादि करने के पश्चात पीले रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

    इसके बाद ‘मां महागौरी’ के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।

    अब मां का तिलक करें और उन्हें सफेद पुष्प, फल आदि अर्पित करें।

    एक उपले के टुकड़े की अंगार पर लौंग, कपूर देशी, घी आदि से अग्यारी करें। 

    विधिवत पूजन के बाद मां की आरती उतारें और वहीं बैठकर मां का ध्यान करते हुए मंत्र जाप करें।

    यदि आप पूरी नवरात्रि के व्रत रखते हैं, तो अष्टमी को हवन करवाना चाहिए।

    इस दिन ‘सुकर्मा योग’ (Sukarma Yoga)

    6 बजकर 9 मिनट से सुबह प्रारंभ होगा 14 अक्टूबर 3 बजकर 47 मिनट तड़के तक रहेगा। इसके बाद ‘धृति योग’ (Dhriti Yoga) प्रारंभ होगा। जैसा कि नाम से ही पता चलता है कि इस योग में कोई शुभ कार्य करना चाहिए। मान्यताओं के अनुसार, इस योग में नई नौकरी ज्वाइन करें या घर में कोई धार्मिक कार्य का आयोजन करें। इस योग में किए गए कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा नहीं आती है और कार्य शुभफलदायक होता है। ईश्वर का नाम लेने या सत्कर्म करने के लिए यह सुकर्मा योग अति उत्तम है।

    पूजा का शुभ मुहूर्त

    अमृत काल- 03:23 AM से 04:56 AM है और ब्रह्म मुहूर्त– 04:48 AM से 05:36 AM तक है।

    दिन का चौघड़िया

    लाभ – 06:26 AM से 07:53 PM तक।

    अमृत – 07:53 AM से 09:20 PM तक।

    शुभ – 10:46 AM से 12:13 PM तक।

    लाभ – 16:32 AM से 17:59 PM तक।

    रात का चौघड़िया 

    शुभ – 19:32 PM से 21:06 PM तक।

    अमृत – 21:06 PM से 22:39 PM तक।

    लाभ (काल रात्रि) – 03:20 PM से 04:53 PM तक।