महादेव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है केदारनाथ, जानें इसमें क्या है खास और इसका इतिहास

    नई दिल्ली : पवित्र सावन का महीना शुरू है, ऐसे में सब शिव भक्त पूजा अर्चना कर रहे है। ऐसे अवसर पर भगवान शिव से जुड़ी बातें कौन नहीं जानना चाहेंगे। आज हम महादेव से जुड़ी कुछ ऐसी खास बातें आपको बताने जा रहे है। जिसके बारें में आप शायद नहीं जानते होंगे। केदारनाथ एक ऐसी जगह है जहां जाने का सपना हर एक शिव भक्त का होता है। उत्तराखंड में बसे इस मंदिर में हजारों लोग श्रद्धा से अपना सिर झुकाते है। भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से केदारनाथ का यह ज्योतिर्लिंग 5वें स्थान पर आता है। 

    प्रतिकूल मौसम को देखते हुए यह मंदिर अप्रैल से नवंबर माह के मध्य ही दर्शन के लिए खुलता है। इस मंदिर का निर्माण पत्थरों से किया गया है। और इसे बनाने के लिए कत्यूरी शैली का उपयोग किया गया है। इस मंदिर के बारे में जहां जाता है कि इसका निर्माण पांडव वंश के जनमेजय ने कराया था। यहां के शिवलिंग की बात की जाए तो वह स्वयंभू शिवलिंग अति प्राचीन काल का है।

    आदि शंकराचार्य ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया। जून 2013 के दौरान भारत के उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश राज्यों में अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण केदारनाथ सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्र रहा। मंदिर की दीवारें गिर गई और बाढ़ में बह गई। इस ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य हिस्सा और सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित रहे लेकिन मंदिर का प्रवेश द्वार और उसके आसपास का इलाका पूरी तरह से तबाह हो गया। एक बाढ़ ने पुरे केदारनाथ को हलाकर रख दिया था। 

    केदारनाथ मंदिर की खासियत 

    भारत के सभी धार्मिक स्थलों के बारें में कहां जाएं तो यह अद्द्भुतता से पूर्ण होते है। केदारनाथ के शिव मंदिर के बारें भी यही है। यह उत्तराखंड का सबसे विशाल शिव मंदिर है, जो कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। ये शिलाखंड भूरे रंग के हैं। मंदिर लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर बना है। इसका गर्भगृह अपेक्षाकृत प्राचीन है जिसे 8वीं शताब्दी के लगभग का माना जाता है। केदारनाथ मंदिर 85 फीट ऊंचा, 187 फुट लंबा और 80 फुट चौड़ा है। इसकी दीवारें 12 फुट मोटी हैं और बेहद मजबूत पत्थरों से बनाई गई है। मंदिर को 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर खड़ा किया गया है। आप भी भगवान शिव के भक्त है तो प्राकृतिक सुंदरता में बसे शिव के इस मंदिर का दीदार एक बार जरूर करे।

    जाने के ये है मार्ग 

    रेल मार्ग

    आपको केदारनाथ जाना है तो सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है। इसके अलावा देहरादून, हरिद्वार और कोटद्वार आकर भी यहां केदारनाथ तक पहुंचा जा सकता हैं। रेलवे मार्ग से अगर आप केदारनाथ जाना चाहते है तो ऊपर दिए हुए रेलवे स्टेशन के जरिये जा सकते है। 

    हवाई मार्ग

    हवाई मार्ग से सफर करने वालों को बता दे कि जॉली ग्रांट एयरपोर्ट यहां का नजदीकी एयरपोर्ट है। इसके जरिये आप कुछ वक्त में ही केदारनाथ पहुंच सकते है। 

    सड़क मार्ग

    जो सड़क मार्ग से केदारनाथ कि यात्रा करने में सक्षम है उन्हें दिल्ली से ऋषिकेश पहुंचकर यहां से भी गौरीकुंड के लिए बसें मिलती हैं। गौरीकुंड ही वह जगह है जहां से केदारनाथ के लिए सड़क खत्म होती है और मंदिर जाने के ट्रैक की शुरुआत होती है।