Rules of Pitru Paksha

Loading

सीमा कुमारी

नवभारत डिजिटल टीम: सनातन धर्म में ‘पितृपक्ष’ (Pitru Paksha) का विशेष महत्व है। हिंदू परंपरा में पितृपक्ष, अपने पितरों को याद करने का एक प्रमुख अवसर है। इस साल ‘पितृपक्ष’ (Pitru Paksha 2023) 29 सितंबर, शुक्रवार से शुरू हो चुकी है, जो कि 14 अक्टूबर तक रहेंगे। ज्योतिष -शास्त्र के अनुसार, पितृपक्ष के दौरान श्राद्ध कर्म करने के साथ-साथ कुछ वास्तु नियमों का पालन भी जरूर करना चाहिए। वरना पितर नाराज हो जाते हैं। इन नियमों का पालन करने से पितृ प्रसन्न होकर परिवार को आशीर्वाद देते हैं, जिससे परिवार में खुशियां बनी रहती हैं। आइए जानें इन नियमों के बारे में-

वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर के मुख्य द्वार को महत्वपूर्ण स्थान माना गया है, क्योंकि यहीं से सकारात्मक ऊर्जा घर के अंदर प्रवेश करती है। ऐसे में पितृपक्ष के दौरान द्वारा की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही रोजाना सुबह मुख्य द्वार पर जल चढ़ाना चाहिए, इससे पितृ प्रसन्न होते हैं।

कहा जाता है कि पितृपक्ष के दौरान तिजोरी को वास्तु के हिसाब से सही स्थान पर रखने पर धन आकर्षित होता है। वैसे तो वास्तु के अनुसार, पितृ पक्ष में धन की तिजोरी को घर की दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। इस दिशा में ही पितरों का वास होता है, ऐसे में वे प्रसन्न होकर आपको सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं।

वास्तु-शास्त्र के अनुसार पितरों की तस्वीर कभी भी अपने बेडरूम, पूजा घर, रसोई जैसी जगहों पर नहीं लगानी चाहिए। ऐसा करने पर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

पितरों की तस्वीर लगाने के लिए भी वास्तु शास्त्र में एक सही दिशा का उल्लेख किया गया है। क्योंकि, दक्षिण दिशा को पितरों की दिशा माना गाया है ऐसे में पितरों की तस्वीर हमेशा दक्षिण दिशा में लगानी चाहिए। ऐसा करने से वास्तु-दोष समाप्त होता है।