शिवराज सिंह और कमलनाथ के बीच बयानबाजी के बाद शुरू हुआ लेटर वॉर

भोपाल: कांग्रेस अध्यक्ष और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ (Kamalnath) द्वारा मंत्री इमरती देवी (Imarti Devi) पर किए आपत्तिजनक टिप्पणी को लेकर राज्य की राजनीति गरमाई हुई है. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह (Shivraj Singh Chauhan) और कमलनाथ के बीच जुबानी जंग के बाद लेटर वॉर शुरू होगया है.

कमलनाथ के लिखे पत्र के जवाब देते हुए चौहान ने कहा, ” मेरे विचार से आपको अपने बयान के लिए ईमानदारी से माफी मांगनी चाहिए. आप जैसे वरिष्ठ एवं जिम्मेदार पद पर रहे कांग्रेसी नेता का अपनी गलती से बचने और उसकी सफाई में अनावश्यक तर्क देने का रवैया उचित नहीं है.”

मुख्यमंत्री ने लिखा, “आपके 15 माह के शासन में महिलाओं और बेटियों पर जो अत्याचार हुए हैं. उसके आंकड़े सभी के सामने हैं , आप की सरकार में महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध और अत्याचारों को रोकने के बजाय , अपनी एवं कांग्रेस की संस्कृति से उनको बढ़ावा देने का ही कार्य किया है. सिर्फ इतना ही नहीं आप केंद्र में यूपीए सरकार के समय महिलाओं के विरुद्ध अपराधों को देख सकते हैं. जिनमें निर्भया जैसे घटनाओं की लंबी फेहरिस्त है.”

लोगों को प्यार करना सीखिए, भले ही आप मध्य प्रदेश के नहीं 

शिवराज ने आगे लिखा, “कमलनाथ जी , मैं आपसे यही कहना चाहता हूं कि आप मध्य प्रदेश और मध्य प्रदेश के लोगों को प्यार करना सीखिए , भले ही आप मध्य प्रदेश के नहीं हैं , उसके बावजूद भी वे आपको स्वीकार करने की कोशिश कर रहे हैं. आप का भी फर्ज बनता है कि आप मध्य प्रदेश के विकास और यहां की जनता के हित के बारे में सोचे. ऐसा कतई नहीं होना चाहिए कि आप मध्य प्रदेश को सिर्फ लूट खसूट का एक जरिया बनाएं और अपना और अपने पार्टी के लोगों का स्वार्थ सिद्ध करें.”

शिवराज ने टिप्पणी को लेकर सोनिया गाँधी को लिखा था पत्र 

ज्ञात हो कि शिवराज ने कमलनाथ की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को पत्र लिखा था. जिसमें उन्होंने लिखा, “उन्होंने सोचा था कि सोनिया गांधी न केवल एक दलित महिला पर अपनी पार्टी के नेता के बयान की निंदा करेंगी बल्कि उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई भी करेंगी. लेकिन आपने अभी तक ऐसा कुछ नहीं किया है.” 

चुनावी मौन व्रत’ रख कर झूठ परोस रहे

कमलनाथ ने शिवराज को पत्र लिखा कर हमला बोलते हुए कहा, “शिवराज आप ऐन केन प्रकार से अपनी कुर्सी बचाने के लिए चुनाव को वास्तविक मुद्दों से भटकाकर अनैतिक और पतित भावनात्मक राजनीति की ओर ले जा रहे हैं. उन्होंने पत्र में लिखा है कि चुनाव जीतने के लिए ‘चुनावी मौन व्रत’ रख कर झूठ परोस रहे हैं.”

कमलनाथ ने पत्र में लिखा, डबरा की सभा में अपने संबोधन में मैंने कोई असम्मानजनक टिप्पणी नहीं की फिर भी आपने झूठ परोस दिया और जिस शब्द की ओर आप इंगित कर रहे है, उस शब्द के कई मायने हैं, कई तरह की व्याख्याएं है लेकिन सोच में खोट के मुताबिक आप और आपकी पार्टी अपनी मन मर्जी की व्याख्या कर झूठ परोसने लगे और जनता को गुमराह करने का काम कर रहे हैं.

कमलनाथ ने लिखा, मैंने अपने 40 वर्ष के सार्वजनिक जीवन में सदैव महिलाओं का सम्मान किया है और मैं सदैव महिलाओं का सम्मान करूंगा परन्तु महिलाओं के सम्मान का दिखावा कर आपकी तरह कुत्सित राजनीति कभी नही करूंगा.”