6 suspended including civil surgeon in Bhandara fire case

  • अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लगी आग

मुंबई. भंडारा जिला अस्पताल (Bhandara District Hospital) में लगी आग (Fire) की रिपोर्ट आ गई है, जिसमें डॉक्टरों और नर्सों को दोषी ठहराया गया है। राज्य के स्वास्थ्य विभाग  (Health Department) ने कार्रवाई करते हुए हादसे के लिए जिम्मेदार सिविल सर्जन डॉ. प्रमोद खांडे  (Civil Surgeon Dr. Pramod Khande) और चिकित्सा अधिकारी अर्चना मेश्राम (Medical Officer Archana Meshram) को निलंबित  (suspended) कर दिया है, जबकि डॉ. सुनीता बाडे को तुरंत स्थानांतरित कर दिया गया है। सुशील आबते को बर्खास्त कर दिया गया है, जबकि नर्स ज्योति भास्कर, स्टाफ नर्स स्मिता अम्बिद्दुलके और शुभांगी सथवाने को निलंबित कर दिया गया है। यह जानकारी स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने दी।

10 शिशुओं की गई थी जान

गौरतलब है कि 9 जनवरी को भंडारा जिला अस्पताल में शिशु देखभाल यूनिट में आधी रात को आग लग गई थी, जिसमें 10 नवजात शिशुओं की जान चली गई। इसमें 8 लड़कियां और 2 लड़के शामिल थे। आग के बाद धमाके में तीन बच्चों की मौत हो गई और सात अन्य की दम घुटने से मौत हो गई थी, जबकि अस्पताल कर्मचारियों की सतर्कता के चलते 7 बच्चों को बचा लिया गया था। मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दुर्घटना की जांच के आदेश दिए थे और खुद पीड़ितों से मिलने उनके घर भी गए थे। संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच समिति नियुक्त की गई थी। समिति ने जांच में पाया कि आग अस्पताल के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण लगी।

7 के खिलाफ कार्रवाई, 6 का निलंबन

स्वास्थ्य मंत्री के अनुसार, भंडारा जिला अस्पताल में आग लगने की रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग को बुधवार की देर रात मिली। रिपोर्ट के अनुसार, आग रेडिएंट हीटर में एक चिंगारी के कारण लगी। आग दोपहर 1 से 1.30 बजे के बीच लगी। कमरे के बंद होने के कारण ही आग फैल गई। अस्पताल का उद्घाटन 2015 में हुआ था। उस समय अस्पताल का फायर ऑडिट नहीं किया गया था। इसे भी आग लगने का कारण बताया गया है। टोपे ने यह भी बताया कि वहां मौजूद डॉक्टर और नर्स अपने कर्तव्य में विफल पाए गए।