The number of patients undergoing corona in Maharashtra may double in the next 15 days, CM Thackeray's letter to PM Modi, said- declare covid-19 a natural disaster

  • छात्रों के भारी विरोध के बाद जागी सरकार
  • एमपीएससी ने सरकार को बताए बिना लिया फैसला, बोले वडेट्टीवार

मुंबई. राज्य में महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग (MPSC) की परीक्षा की नई तारीख शुक्रवार को घोषित की जाएगी। यह जानकारी मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने दी है। छात्रों के भारी विरोध के बाद  मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Chief Minister Uddhav Thackeray) ने कहा है कि अगले 8 दिनों के अंदर यह परीक्षा आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने राज्य के मुख्य सचिव के अलावा एमपीएससी के अधिकारियों से बात कर शुक्रवार को नई तारीख घोषित करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले  एमपीएससी ने कोरोना के बढ़ते मामलों का हवाला देते हुए 14 मार्च को होने वाली प्रीलिम्स परीक्षा को रद्द करने की घोषणा की थी, जिसके खिलाफ छात्रों के साथ बीजेपी व कांग्रेस के नेताओं ने मोर्चा खोल दिया था। 

छात्रों के भारी विरोध को देखते हुए मुख्यमंत्री ठाकरे ने सोशल मीडिया (Social Media) पर छात्रों (Students) को संबोधित करते हुए कहा कि उन्हें किसी के बहकावे में आने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए छात्रों को सावधानी  बरतने की जरुरत है, लेकिन उनके भविष्य का भी ख्याल है। ठाकरे ने कहा कि परीक्षा (Exam) को लेकर छात्रों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। इससे पहले एमपीएससी की परीक्षा11 अक्टूबर 2020 को होनी थी, लेकिन आयोग की ओर से 14 मार्च के लिए इसका नया शेड्यूल जारी किया था। ऐसे में एक बार फिर एमपीएससी की परीक्षा को अचानक रद्द कर दिए जाने से छात्रों में काफी आक्रोश था। इसके खिलाफ नागपुर, पुणे,अहमदनगर, कोल्हापुर व जलगांव समेत कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन किया। वहीं, एमपीएससी के इस फैसले पर महाराष्ट्र विकास आघाड़ी सरकार में शामिल दलों के अलावा विपक्ष ने भी एकजुट होकर विरोध किया।

एमपीएससी ने बिना सहमति के लिया फैसला

मदद व पुनर्वसन मंत्री विजय वडेट्टीवार ने कहा कि एमपीएससी ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला बिना सरकार की सहमति के लिया है। उन्होंने कहा कि इस मामले में अब एमपीएससी अधिकारियों की जांच की जाएगी।

एमपीएससी की मनमानी

यह पहली बार नहीं है कि एमपीएससी ने इस तरह की मनमानी की हो। इससे पहले एमपीएससी ने राज्य सरकार को जानकारी दिए बिना एसईबीसी छात्रों की नियुक्तियों को रद्द करने लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दी थी। जिसके बाद  मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इस मामले में जांच के आदेश दिए थे। मुख्यमंत्री के भड़कने के बाद आनन-फानन में एमपीएससी ने अपनी याचिका को वापस लेने की घोषणा कर दी थी। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री अजीत पवार समेत कई मंत्रियों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की थी। मराठा आरक्षण पर बैन लगाए जाने के बाद महाविकास आघाड़ी सरकार पहले से मुश्किलों का सामना कर रही है। ऐसे में एमपीएससी द्वारा परीक्षा रद्द किए जाने की घोषणा से सरकार का सिरदर्द और बढ़ गया था।  

परीक्षा रद्द होने पर हुई राजनीति

एमपीएससी की परीक्षा रद्द करने की घोषणा के साथ ही इस पर राजनीति तेज हो गई थी। विधानसभा में नेता विपक्ष देवेन्द्र फडणवीस ने इस फैसले को तुरंत वापस लेने की मांग की। उन्होंने कहा है कि परीक्षा रद्द करने से इसकी तैयारी करने वाले काफी छात्रों को आर्थिक व मानसिक परेशानी उठानी पड़ेगी। ऐसे में परीक्षा को स्थगित करने का फैसला तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए।    

छात्रों के भविष्य के लिए हो परीक्षा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा है कि कई संकटों का सामना करते हुए काफी संख्या में छात्र एमपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। ऐसे में छात्रों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए यह परीक्षा जरुर आयोजित की जानी चाहिए।

अधिवेशन और शादी हो सकती है तो परीक्षा क्यों नहीं !

महाराष्ट्र कांग्रेस के सीनियर नेता व पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि जब कोरोना के बढ़ते मामलों के बावजूद महाराष्ट्र विधान मंडल का अधिवेशन और शादी समारोह आयोजित किए जा सकते हैं, तो फिर परीक्षा का आयोजन क्यों नहीं किया जा सकता है।

एमपीएससी का फैसला सही

एमपीएससी परीक्षा को रद्द किए जाने का कई नेता विरोध कर रहे थे, लेकिन शिव संग्राम नेता विनायक मेटे ने परीक्षा को रद्द किए जाने के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में कोरोना की स्थिति और उच्चतम न्यायालय में लंबित मराठा आरक्षण के मुद्दे को देखते हुए परीक्षा स्थगित करने का फैसला किया है। मेटे ने कहा कि  परीक्षाएं सिर्फ स्थगित हुई हैं, रद्द नहीं। कोरोना के मामले में छात्रों को  इस तरह से भ्रमित करना उचित नहीं है। अगर छात्रों को कुछ होता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

मेटे ने किया आग में तेल डालने का काम

मदद व पुनर्वसन मंत्री विजय वडेट्टीवार ने विनायक मेटे के बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा है कि वे आग में तेल डालने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के मुद्दे को लेकर इस तरह की राजनीति नहीं होनी चाहिए।  

छात्रों के भविष्य के साथ न हो खिलवाड़

विधान परिषद में विपक्ष के नेता प्रवीण दरेकर ने कहा कि एमपीएससी की परीक्षा को रोक कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जाना चाहिए।

यूथ कांग्रेस का विरोध

एमपीएससी परीक्षा रद्द किए जाने के खिलाफ प्रदेश यूथ कांग्रेस ने भी मोर्चा खोल दिया था। महाराष्ट्र यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष सत्यजित तांबे की अगुवाई में कार्यकर्ताओं ने अहमदनगर में प्रदर्शन किया।

कोरोना नियमों के साथ हो परीक्षा

एनसीपी के युवा विधायक रोहित पवार ने कहा है कि जिस तरह बाकी के काम कोरोना नियमों का पालन करते हुए किया जा रहा है,उसी तरह एमपीएससी की परीक्षा भी आयोजित की जानी चाहिए।