राणे के खिलाफ महाविकास अघाड़ी नेताओं का जवाबी हमला, कहा- “टर-टर करने से आकाश नहीं फटता”

मुंबई. शिवसेना (Shivsena) की दशहरा रैली (Dassehra Rally) के बाद मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (CM Udhav Thackeray) पर विपक्ष का हमला तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री नारायण राणे (Narayan Rane) ने चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि मैं मातोश्री (Matoshree) का काला चिट्ठा खोलूंगा तो बहुत भारी पड़ेगा। जिसके बाद शिवसेना नेता दादा भूसे (Shivsena Minister Dada Bhuse) ने राणे पर पलटवार करते हुए जवाब दिया है। भूसे ने कहा कि, “राज्य के मुख्यमंत्री का एकल उल्लेख करना अशोभनीय है। इतना ही नहीं तो यह महाराष्ट्र की संस्कृति को भी शोभा नहीं देता। इसलिए नारायण राणे की मेडिकल जांच करने की जरुरत है।”

सभ्य समाज में शब्दों की मर्यादा होती है – नवाब मलिक  

राष्ट्रवादी के राष्ट्रीय प्रवक्ता व कैबिनेट मंत्री नवाब मलिक (National spokesperson and cabinet minister Nawab Malik) ने राणे पर निशाना साधते हुए कहा कि कोई कितना ही टर-टर कर ले, आकाश फटने वाला नहीं और न ही बारिश होने वाली है। मलिक ने कहा कि महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के लिए अपमान जनक शब्दों का इस्तेमाल सही नहीं है। उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में शब्दों की मर्यादा होती है और उसका पालन किया जाना चाहिए।  

राणे का इतिहास सभी को पता है 

भूसे ने कहा, “राणे का इतिहास और भूगोल सभी को पता है। पत्रकार परिषद में बीजेपी सांसद नारायण राणे के हावभाव को देखते हुए उनकी मेडिकल जांच करना आवश्यक है। राणे की उम्र और आदित्य ठाकरे की उम्र में काफी अंतर है फिर भी राणे ने आदित्य से ‘संयम को कैसे बनाये रखे’ यह बात सीखनी चाहिए।”     

महाराष्ट्र की जनता ठाकरे सरकार के साथ – उदय सामंत

वहीं उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री उदय सामंत (Uday Samant) ने कहा कि, “महाराष्ट्र को एक राजनीतिक इतिहास है। मराठा आरक्षण के बारे में सरकार गंभीरता से काम कर रही है। ऐसा बोला जा रहा है कि, 15 विधायक चुनकर आएंगे या सरकार गिरेगी। लेकिन राणे के पत्रकार परिषद से पता चलता है की महाराष्ट्र की जनता ठाकरे सरकार को ही चुनकर देगी।”

क्या कहा था राणे ने? : मुंबई में आयोजित पत्रकार परिषद में राणे ने कहा कि इतने वर्षों तक शिवसेना प्रमुख की वजह से चुप बैठा था। लेकिन यदि इस तरह का दुस्साहस दोबारा किया गया तो 39 वर्षों तक शिवसेना में रहकर जो देखा, अनुभव किया है, वह सब बाहर आएगा। उन्होंने कहा कि चुनाव के पहले हिंदुत्व मुख्यमंत्री बनते हुए यह सेक्युलर केंचुए जैसा हो गया। यदि बाल ठाकरे होते तो उद्धव को मुख्यमंत्री नहीं बनाते। मेंढक एक दिशा में जाता है जबकि केंचुआ दोनों तरफ।