भ्रष्टाचार को छुपाने जलाए गए मंदा खड़से के कार्यकाल के रिकार्ड

  • दुग्ध संघ के पूर्व सुरक्षा अधिकारी एन. जे. पाटिल का आरोप
  • दुग्ध संघ में करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार

जलगांव. बीएचआर (BHR) में हुए घोटाले के बाद जिले में घोटालों की बाढ़ आ गई है। इस बार भाजपा (BJP) से नाराज होकर एनसीपी (NCP)  में आये एकनाथ खड़से (Eknath Khadse) की धर्मपत्नी मंदा खड़से (Manda Khadse) पर  करोड़ों रुपए का गबन करने का आरोप दुग्ध संघ के पूर्व सुरक्षा अधिकारी एन. जे. पाटिल ने लगाया है।

एन. जे. पाटिल ने कहा कि जिला सहकारी दुग्ध संघ में बड़े पैमाने पर करोड़ों रुपयों का भ्रष्टाचार हुआ है और इसे छुपाने के लिए चैयरमैन मंदा खड़से ने रिकार्ड जलाकर नष्ट कर दिया है। जिसके चलते अभिलेख उपलब्ध नहीं होने के कारण पुलिस जांच में रुकावटें आ सकती हैं।

पत्रकार संघ में आयोजित पत्रकार वार्ता में पाटिल ने कहा कि 1975 से 2000 तक जिला सहकारी दुग्ध संघ के सभी रिकॉर्ड वर्तमान अध्यक्ष मंदा एकनाथ खड़से के कार्यकाल में जलाए गए हैं, जबकि  मामला न्याय प्राविष्ट  है। इसके  बावजूद सबूत मिटाने रेकॉर्ड जलाया गया है। कानूनन इसे नष्ट करने से पहले महाराष्ट्र सरकार, पुलिस विभाग और अदालत की अनुमति लेना था, लेकिन नहीं ली गयी, जिससे पुलिस और अदालत की कार्यवाही के साथ दर्ज शिकायतों की जांच में बाधा आ सकती है।

मंदा खड़से जबसे चेयरमैन बनीं, तबसे करोड़ों रुपए का कर्ज 

जलगांव जिला दुग्ध संघ 1995 से 2012 तक एनडीडीबी के नियंत्रण में था। इस दौरान कई गलत निर्णय लिए गये।  इस दौरान दुग्ध संघ पर एक रुपया भी कर्ज नहीं था। पूर्व मंत्री एकनाथ खड़से की पत्नी मंदा खड़से जबसे दुग्ध संघ की चेयरमैन बनीं हैं, तबसे करोड़ों रुपए का कर्ज संघ पर हुआ है। सरकार की विभिन्न योजनाओं से 117 करोड़ रुपये का अनुदान और कर्ज लेने के बाद भी दुग्ध संघ का विकास नहीं हुआ है।

कोर्ट के आदेश के बाद भी पुलिस ने नहीं की कार्रवाई

2013 में  मुख्य न्यायाधीश द्वारा दिए गए आदेश के बाद भी पुलिस  कोई कार्रवाई नहीं की। मंदा खड़से के कार्यकाल में रिकार्ड नष्ट होने से भ्रष्टाचार के सबूत भी मिट सकते हैं। इसलिए इस बात को लेकर खड़से ने  चेयरमैन के रूप में इस बात का स्पष्टीकरण देना चाहिए, पाटिल ने ही यह मांग की। जलगांव जिला सहकारी दूध संघ पर पहले कर्जा नहीं था, पर अब हो गया है। एकनाथ खड़से मंत्री होने से डर के मारे अनुभवी संचालक खामोश रहे और किसी भी बात का विरोध नहीं किया। यही वजह है आज भी मंदा खड़से ही चेयरमैन बनी हुई है। उनके कार्यकाल में हुए सभी कार्य संदिग्ध के घेरे में है। अनियमित रूप से हुए है। इसकी भी जांच करने की मांग प्रेस कांफ्रेंस में पाटिल ने की।