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    मुंबई. मुंबई पुलिस (Mumbai Police) के अधिकारी सचिन वाझे (Sachin Vaze) की अचानक तबीयत बिगड़ गई। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वह राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) (NIA) की हिरासत में थे। बता दें कि वाझे को मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) के घर एंटीलिया (Antilia) के बाहर विस्फोटक से भरी स्कॉर्पियो मिलने व उसके मालिक मनसुख हीरेन (Mansukh Hiren) की मौत के मामले में एनआईए ने गिरफ्तार किया है।

    वाझे को सीने में दर्द के चलते मुंबई के जेजे अस्पताल में भर्ती किया गया है। उनके सीने का एक्स-रे कराया गया। इसके अलावा उनके अन्य टेस्ट किए जा रहे हैं। 

    जल्द होंगे बड़े खुलासे!

    सूत्रों कि माने तो मनसुख हीरेन की मौत के मामले एनआईए जल्द ही अहम खुलासे कर सकती है। साथ ही लोगों को भी हिरासत में ले सकती है। इस मामले में इनोवा और स्कॉर्पियो के ड्राइवर का पता चल गया है। दोनों से पूछताछ जारी है। दोनों सचिन वाझे के करीबी थे। फिलाहल एनआईए वाझे के ठाणे स्थित घर के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।

    हाईकोर्ट में लगाई बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका

    वाझे ने एनआईए द्वारा की गयी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। उन्होंने सोमवार को बंबई उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की। इस याचिका में दावा किया गया है कि वाजे को ‘कुछ राजनीतिक ताकतों’ ने ‘बलि का बकरा’ बनाया है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका आमतौर पर ‘अवैध हिरासत या गिरफ्तारी’ को चुनौती देने के लिए दायर की जाती है। इस याचिका में उच्च न्यायालय से दरख्वास्त की गयी है कि वह एनआईए को अदालत के सामने पेश करने और यह साबित करने का निर्देश दे कि गिरफ्तारी के दौरान उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।

    याचिका में कहा गया है कि पुलिस अधिकारी को प्राथमिकी की प्रति नहीं दी गयी और उन्हें गिरफ्तारी का कारण भी नहीं बताया गया एवं न ही उनके परिवार को सूचित किया गया। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि जिस हड़बड़ी के साथ वाजे को गिरफ्तार किया गया, वह यह दर्शाता है कि केंद्रीय एजेंसी ने दुर्भावना से कार्रवाई की।

    याचिका में कहा गया है कि हिरेन की मौत के लिए उनकी पत्नी द्वारा वाजे पर लगाये गये आरोप झूठे हैं। वाझे ने दावा किया कि जब महाराष्ट्र के आतंकवाद निरोधक दस्ते ने उनके विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज की तब ‘पूरी मीडिया बिरादरी और समाज उन्हें निशाना बनाने लगाया क्योंकि उन्हें बलि का बकरा चाहिए था। यह याचिका अभी सूचीबद्ध नहीं की गयी है।