ठाकरे सरकार ने ‘दिशा कानून’ को दी मंजूरी, 21 दिनों में होगी आरोपी को सजा

मुंबई. राज्य में महिलाओं की सुरक्षा (Women Safety) के लिए ‘दिशा कानून’ (Disha Law) अधिवेशन में पारित किया गया है। राज्य में दिशा कानून पारित होने के कारण महिलाओं के लिए एक सुरक्षा की ढाल बन गई है। तदानुसार, एक महिला पर ज़बरदस्ती की गई तो सीआरपीसी (CRPC) धारा में बदलाव पर चर्चा की गई थी।

इसके अनुसार, आजीवन कारावास (Lifetime Imprisonment) को अब मौत की सजा (Death Sentence) में बदल दिया गया है। इस कानून को ‘दिशा कानून शक्ति बील’ का नाम दिया जाएगा। इस कानून के तहत अब आरोपियों को फास्ट ट्रैक पर सजा दी जाएगी। साथ ही, इसमें आरोपी को 21 दिनों में फांसी देने का प्रावधान है। (Thackeray government approves ‘Disha Law’, provision to hang accused in 21 days)

राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा

प्रस्तावित कानून को राज्य में लागू करने के लिये विधेयक के मसौदे में भादंसं, सीआरपीसी और यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की प्रासंगिक धाराओं में संशोधन करने का प्रस्ताव है। गृह मंत्री अनिल देशमुख ने बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा कि मंत्रिमंडल ने यहां एक बैठक में विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी और इसे आगामी शीतकालीन सत्र के दौरान राज्य विधानमंडल में पेश किया जाएगा।

15 दिनों के भीतर मामले में जांच होगी पूरी 

विधानमंडल का दो दिवसीय शीतकालीन सत्र 14 दिसंबर से मुंबई में शुरू हो रहा है। उन्होंने कहा कि विधेयक विधानमंडल के दोनों सदनों में चर्चा और अनुमोदन के लिए आएगा। इसे कानून का रूप ले लेने पर ‘शक्ति अधिनियम’ कहा जाएगा। देशमुख ने कहा कि इसमें 15 दिनों के भीतर किसी मामले में जांच पूरी करने और 30 दिन के भीतर सुनवाई का प्रावधान है। 

मुख्यमंत्री उद्धव बाळासाहेब ठाकरे यांच्या अध्यक्षतेखाली झालेल्या मंत्रिमंडळाच्या बैठकीत आज पुढीलप्रमाणे निर्णय घेण्यात आले. #मंत्रिमंडळनिर्णय Anil Deshmukh

Posted by CMOMaharashtra on Wednesday, 9 December 2020

‘दिशा कानून’ क्या है?

आंध्र प्रदेश सरकार (Government of Andhra Pradesh) ने बलात्कारी (Rapist) को कठोरतम सजा, वह भी महज 21 दिनों में देने के लिए, 2019 में दिशा विधेयक (Disha Bill) पेश किया था। इसमें बलात्कार (Rape) और सामूहिक बलात्कार (Gang Rape) के मामलों में मौत की सजा का प्रावधान है।

इस नए कानून के तहत, बलात्कार के दोषी को 21 दिनों के भीतर मौत की सजा देने का प्रावधान है। वर्तमान कानून के तहत मुकदमा चलाने के लिए चार महीने की अवधि होती है। लेकिन दिशा कानून के तहत, यह प्रक्रिया केवल 21 दिनों में पूरी की जाएगी। इन मामलों के लिए 13 जिलों में विशेष अदालतें (Court) स्थापित की जाने वाली हैं और इन अदालतों में बलात्कार, यौन उत्पीड़न (sexual harrasment) और महिलाओं/लड़कियों के खिलाफ अत्याचार के मामलों की सुनवाई की जाएगी।

‘दिशा कानून’ प्रक्रिया

  • रेप के मामलों में पुख्ता सबूत होने पर अदालतें 21 दिन में दोषी को मौत की सज़ा सुना सकती हैं।
  • पुलिस को सात दिनों के भीतर जांच पूरी करनी होगी।
  • स्पेशल कोर्ट को 14 दिनों के भीतर ट्रायल पूरा करना होगा।
  • सारी प्रक्रियाओं को 21 दिन में पूरा करना होगा।

हैदराबाद (Hyderabad) की घटना के बाद महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखकर कड़े कानून का प्रावधान किया गया है। आंध्र प्रदेश (Andra Pradesh) की जगन मोहन सरकार (Jagan Mohan Sarkar) ने विधानसभा (Assembly) में आंध्र प्रदेश दिशा बिल, 2019 (Andhra Pradesh Directions Bill, 2019) को पास कर दिया है। विधेयक में दिशा नाम हैदराबाद रेप (Hyderabad rape) की पीड़िता को दिए काल्पनिक नाम की वजह से जोड़ा गया है।