Stock investment is also a business

    हर रिटेल इन्वेस्टर (Retail Investor) स्टॉक मार्केट (Stock Market) में सफलता प्राप्त कर अच्छी कमाई करना चाहता है, लेकिन बहुत कम निवेशक (Investors) ही सफल (Success) हो पाते हैं। अधिकांश नुकसान में ही रहते हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है बिना कोई रिसर्च और जानकारी के केवल ‘टिप्स’ (Tips) के भरोसे किसी भी कंपनी में निवेश करना। क्योंकि इस मार्केट में निवेश करना भी एक बिजनेस है और जो यहां बिजनेसमैन की तरह पूरे रिसर्च (Research) के बाद नफा-नुकसान (Profit-Loss) का आकलन कर निवेश करता है, वही सफल हो पाता है। आज पोर्टफोलियो मैनेजर और प्राइवेट इक्विटी फंड मैनेजर इसी कारण से सफल हो रहे हैं। पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विस (PMS) प्रदाता कंपनी इक्विट्री कैपिटल एडवायजर्स लिमिटेड (Equitree Capital Advisors Ltd.) के संस्थापक और निदेशक सीए पवन भराडिया (Pawan Bharaddia) का नाम बाजार में बड़े एवं सफल निवेशकों में लिया जाता है। मोर्गन स्टेनली (Morgan Stanley) और एबीएन एमरो बैंक (ABN Amro Bank) जैसी अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में सेवाएं देने के बाद भराडिया ने 10 साल पहले अपने मित्र सीए सुनीत काबरा के साथ मिलकर इक्विट्री कैपिटल की स्थापना कर बाजार में निवेश शुरू किया। निवेश गुरू पवन भराडिया से उनकी सक्सेस इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी, रिटेल निवेशकों के लिए निवेश मंत्र और अर्थव्यस्था एवं बाजार के भावी परिदृश्य के संबंध में वाणिज्य संपादक विष्णु भारद्वाज ने विस्तृत चर्चा की। पेश हैं उसके मुख्य अंश:-

    पिछले एक साल में स्टॉक मार्केट काफी बढ़ चुका है। क्या अब आगे भी तेजी जारी रहने की उम्मीद है?

    इस बार की तेजी दो बड़े कारणों से आई है। एक तो ब्याज दरें (Interest Rates) निचले स्तरों पर आने से वर्ल्डवाइड और इंडियन मार्केट में लिक्विडिटी (Liquidity) बहुत ज्यादा बढ़ गयी है। दूसरे, कोविड संकट के बाद स्ट्रक्चरल और फंडामेंटल परिवर्तन होने से कार्पोरेट अर्निंग (Corporate Earnings) यानी मुनाफा (Profit) तेजी से बढ़ रहा है। साथ ही एक महत्वपूर्ण बात यह हुई कि IL&FS और अन्य वित्तीय घोटालों के बाद कंपनियों ने अपने डेब्ट (Debt) घटाने करने पर जोर दिया। इसके अलावा भारत सरकार चाइना से आयात निर्भरता घटाने के लिए ‘आत्मनिर्भर भारत’ (Atmanirbhar Bharat) और ‘पीएलआई स्कीम’ (PLI) के जरिए डोमेस्टिक प्रोडक्शन बढ़ाने में सफल हो रही है। सौलार एनर्जी, केमिकल, फार्मा, टेक्सटाइल, एग्री, इंजिनियरिंग, टेलिकॉम प्रोडक्ट सहित कई क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन और निर्यात बढ़ रहा है। कार्पोरेट इंडिया नया निवेश भी कर रहा है। रिलायंस (RIL) ने 60,000 करोड़ रुपए का नया निवेश करने की घोषणा की है। इन सब कारणों से आगे देश की ग्रोथ तेज होगी तो मार्केट में भी और तेजी आएगी। हालांकि अब इंडेक्स (Sensex-Nifty) का वैल्यूएशन थोड़ा महंगा हो गया है। इसलिए इंडेक्स में 10 से 12% तथा मिड (Mid Cap) और स्माल कैप (Small Caps) स्टॉक्स में इससे ज्यादा तेजी आने की संभावना है।   

    जोखिम क्या दिख रहे हैं?

    ब्याज दरों में वृद्धि की आशंका और कोविड की तीसरी लहर का खतरा बड़े जोखिम दिख रहे हैं। यूएस (US) में ब्याज दरें बढ़नी शुरू होने पर बाजार गिरने लग जाएगा। लेकिन निकट भविष्य में तो नहीं, परंतु एक से डेढ़ साल में अवश्य वृद्धि होगी। 

     PMS और म्युचुअल फंड की इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटजी में मुख्य अंतर क्या है?

    वैसे तो दोनों ही काफी रिसर्च के बाद एक ही तरह से निवेश करते हैं, लेकिन PMS (Portfolio Management Services) में हर निवेश पर फोकस अधिक रखा जाता है। जहां म्युचुअल फंड (Mutual Funds)  शॉर्ट, मीडियम और लॉन्ग टर्म, हर तरह का नजरिया रखते हैं और अपनी स्कीम में 60 से 70 स्टॉक रखते हैं। वहीं PMS सिर्फ सलेक्टेड 12 से 15 स्टॉक में ही निवेश करते हैं और केवल लॉन्ग टर्म व्यू रखते हैं। क्योंकि किसी भी बिजनेस में ग्रोथ आने में समय लगता है और कोई भी स्टॉक लॉन्ग टर्म में ही ‘मल्टीबैगर’ (Multibagger) बनता है यानी कई गुना लाभ देता है। हम करीब 250 अच्छी कंपनियों में निवेश से पहले उन्हें ट्रैक करते हैं। फिर उनमें से सर्वश्रेष्ठ 12 से 15 कंपनियों को सलेक्ट कर 3 से 5 साल के लिए निवेश करते हैं और लॉन्ग टर्म में ‘मल्टीबैगर’ बनने पर शानदार कमाई कर पाने में सफल होते हैं।

     रिटेल इन्वेस्टर के लिए PMS और म्युचुअल फंड में कौनसा विकल्प अधिक सही है?

    PMS में रिटर्न ज्यादा मिलता है, लेकिन रिस्क भी अधिक होता है। इसलिए ‘सेबी’ ने PMS में न्यूनतम निवेश सीमा 50 लाख रुपए रखी है और म्युचुअल फंड में तो 500 रुपए से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। इसलिए रिटेल इन्वेस्टर के लिए तो म्युचुअल फंड का विकल्प ही सही है। जबकि HNI यानी बड़ा इन्वेस्टर, जो ज्यादा निवेश करना चाहता है, उसके लिए PMS बेस्ट है।  

    मार्केट में निवेश करना आसान है, लेकिन समय पर निकलना कठिन होता है।  क्या इक्विट्री कैपिटल विगत 10 वर्षों में समय पर एक्जिट करने में सफल रही है?

    यह सही है कि स्टॉक मार्केट में या किसी भी निवेश माध्यम में इन्वेस्टमेंट से अधिक एक्जिट (Exit) करना ज्यादा महत्वपूर्ण होता है। क्योंकि यदि आप समय पर प्रॉफिट बुक नहीं कर पाते हैं तो उस निवेश का कोई मतलब नहीं है। इसलि‍ए हम ‘स्मार्ट इन्वेस्टमेंट’ के साथ ‘स्मार्ट प्रॉफिट’ की पॉलिसी पर चलते हैं। इक्विट्री कैपिटल ने जो स्टॉक 2012 में खरीदे, उन्हें 2014 में बेच दिए और 42% का वार्षिक रिटर्न (CAGR) कमाया। फिर 2014 के अंत में जो निवेश किया, उसे 2017 में बेच कर 37% का रिटर्न कमाया। वर्तमान में भी इक्विट्री कैपिटल सबसे अच्छा रिटर्न प्राप्त करने वाली PMS है। मई 2021 तक विगत 12 महीनों में हमने 165% का रिटर्न अर्जित किया है।  

    आज मार्केट में हजारों अच्छी कंपनियां हैं, उनमें से श्रेष्ठ का चयन करते समय आप क्या मुख्य फैक्टर देखते हैं?

    निवेश करने के पहले हम कंपनी में 4 फैक्टर्स पर सबसे ज्यादा फोकस करते हैं। पहला, बिजनेस में ग्रोथ अवसर (Growth Opportunities) क्या हैं। दूसरा, कैश फ्लो (Cash Flow) कितना है। क्योंकि कोई कंपनी प्रॉफिट भले ही कमा रही है, लेकिन यदि अपना कैश फ्लो नहीं बढ़ा पा रही है तो वह न डिविडेंड दे पाएगी, न बिजनेस का विस्तार कर पाएगी और कभी भी क्राइसिस में आ सकती है। तीसरा फैक्टर, राइट वैल्यू (Right Value) यानी वैल्यूएशन आकर्षक होना चाहिए। और सबसे महत्वपूर्ण, हम उसी कंपनी में निवेश करते हैं, जिस बिजनेस को हम अच्छी तरह समझ सकते हैं। इसलिए ‘प्राइवेट इक्विटी इन्वेस्टमेंट एप्रोच’ (Private Equity Investment Approach) के साथ लॉन्ग टर्म (Long Term) के लिए बड़ा निवेश करते हैं।