Stock Bull

    मुंबई. शेयर बाजार (Stock Market) को देश की अर्थव्यवस्था (Economy) का आईना माना जाता है। जब अर्थव्यवस्था में तेजी आती है तो इस बाजार में तेजी और अर्थव्यवस्था में मंदी तो बाजार में भी मंदी का माहौल बन जाता है, परंतु वर्तमान में शेयर बाजार विपरीत चाल चल रहा है। चाइनीज वायरस कोविड की महामारी के कहर से अर्थव्यवस्था डांवाडोल है। ग्रोथ रेट (Growth Rate) निगेटिव दर्ज हो रही है। देश के विकास में अहम योगदान देने वाले पर्यटन, होटल-रेस्टोरेंट, मनोरंजन जैसे कई उद्योग क्षेत्रों की हालत खस्ता है। इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद स्टॉक मार्केट में तेजी आ रही है और वह भी रिकार्ड तोड़ तेजी। 

    कोरोना संकट शुरू होने के बाद से लेकर अब तक विगत 15 महीनों में बीएसई सेंसेक्स (Sensex), जिसे अर्थव्यवस्था का बैरोमीटर माना जाता है, 80% उछाल के साथ 53,000 अंक की नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। इससे लोग हैरान है और कुछ तो इसे कोई घोटाला बता रहे हैं। आखिर ऐसे क्या कारण हैं, जिनकी वजह से शेयर बाजार लगातार दौड़ रहा है और क्या आगे भी दौड़ेगा या नहीं? इस बारे में ‘नवभारत’ ने विशेषज्ञों की राय जानी। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तेजी विश्वव्यापी है तथा स्टॉक मार्केट हमेशा भविष्य की उम्मीदों पर चलता है और वर्तमान में बाजार के निवेशक वर्तमान से ज्यादा भविष्य की अच्छी उम्मीदों पर निवेश कर रहे हैं।

    कार्पोरेट अर्निंग बढ़ना सबसे बड़ा कारण : श्रीकांत चौहान

    कोटक सिक्युरिटीज के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्रीकांत चौहान का कहना है कि इस बार तेजी अलग तरह की है और फंडामेंटल फैक्टर्स पर आधारित है, यह तेजी ‘बुलबुला’ कतई नहीं लग रही है। हमारा मानना है कि तेजी लगातार इसलिए जारी है कि कार्पोरेट अर्निंग (Corporate Earnings) बढ़ रही है और आगे भी बढ़ने की उम्मीद है। यही इस बार की तेजी का सबसे बड़ा कारण है। क्योंकि किसी भी स्टॉक मार्केट में जब सेक्टर की, कंपनियों की अर्निंग बढ़ती है तो उसका सीधा असर स्टॉक प्राइस (Stock Prices) पर होता है और यह असर लंबे समय तक रहता है। निवे‍शक (Investors), निवेश करते समय यही तथ्य देखते हैं। और इस बार तो न केवल कंपनियों का मुनाफा (Profit) बढ़ रहा है बल्कि कंपनियां अपना कर्ज (Debt) भार घटाकर और मजबूत हो रही हैं।

    राहत पैकेजों ने किया ‘संजीवनी’ का काम

    श्रीकांत चौहान ने कहा कि दूसरे, विश्व स्तर पर जबरदस्त मनी फ्लो हुआ है। 2008 में जब लेहमान ब्रदर्स का संकट गहराया तो अमेरिका के केंद्रीय बैंक को उस मंदी से अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 6-7 महीने लग गए, लेकिन इस बार पिछले वित्तीय संकट से सबक लेते हुए केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) ने 20 दिन में ही बैंकिंग सिस्टम में पैसा डालना शुरू कर दिया। दुनिया में अन्य बड़े देशों ने भी यही किया। भारत में भी रिजर्व बैंक ने तुरंत मनी फ्लो बढ़ा दिया। जिससे इस बार कोविड महामारी के बड़े संकट के बावजूद बैंकिंग सिस्टम ध्वस्त नहीं हुआ। केंद्रीय बैंकों के राहत पैकेजों ने ‘संजीवनी’ का काम किया। सरकार ने भी इंडस्ट्री को पूरा सपोर्ट दिया। और कोविड संकट कम होने पर मांग तेजी से निकली और आपूर्ति प्रभावित रही। नतीजन सभी कमोडिटीज में तेजी आई और कार्पोरेट अर्निंग तेजी से बढ़ रही है।

    आगे भी तेजी जारी रहने की उम्मीद

    तीसरे, डिजिटलाइजेशन से देश में निवेश जागरूकता तेजी से बढ़ रही है। जिससे बाजार में रिटेल मनी का फ्लो बहुत बढ़ गया है। इससे बाजार और मजबूत हो रहा है। आगे भी तेजी जारी रहने की उम्मीद है। क्योंकि सरकार लगातार रिफॉर्म कर रही है। इसके अलावा अमेरिका में जब तक ब्याज दरें निचले स्तर पर रहेंगी, विदेशी निवेश आता रहेगा। हालांकि अब कई सेक्टर महंगे मूल्यांकन पर पहुंच गए हैं। इसलिए रिटेल इन्वेस्टर के लिए हर गिरावट में ही नया निवेश करना अधिक सही होगा। 5 से 7% करेक्शन संभव है, फिर 10 से 15% की तेजी आने की संभावना है।

    • श्रीकांत चौहान की टॉप निवेश पिक: टाटा स्टील, L&T, टेक महिंद्रा, SBI, एस्कॉर्टस                  

    ‘अग्नि परीक्षा’ में सफल होता कार्पोरेट इंडिया : एस. रंगनाथन

    LKP सिक्युरिटीज के रिसर्च हेड एस. रंगनाथन का कहना है कि मार्केट हमेशा भविष्य को देख कर परफॉर्म करता है और वर्तमान में कोविड महामारी के संकट को लेकर चिंता अवश्य है, लेकिन आगे भविष्य उज्जवल दिख रहा है। देश की आर्थिक ग्रोथ इस साल तेज होने की उम्मीद है। कोविड महामारी कार्पोरेट इंडिया के लिए ‘स्ट्रैस टेस्ट’ (Stress Test) यानी ‘अग्नि परीक्षा’ है। यह परीक्षा हर सेक्टर, हर कंपनी की है। आज इन्वेस्टर यही देख रहे हैं कि इस कठिन ‘स्ट्रैस टेस्ट’ में जो सेक्टर, जो कंपनी सफलता प्राप्त करेगी, वह और मजबूत बन कर उभरेगी। तेज ग्रोथ करने में सफल होगी। जब कोविड संकट खत्म हो जाएगा तो कार्पोरेट इंडिया की ग्रोथ बहुत ज्यादा आएगी। इसलिए आज जो निवेशक भविष्य की उम्मीदों पर खरीद रहे हैं, वे 6 से 9 माह बाद बेचने आएंगे।

    यह ‘बुल मार्केट’ है

    रंगनाथन ने कहा कि इसके अलावा सरकार ने विगत ‍‍वर्षों में जो रिफॉर्म (Reforms) किए और कर रही है, उनका असर आगामी वर्षों में दिखाई देगा, जिनसे देश की ग्रोथ और तेज होगी। जून 2021 में अब तक ई-वे बिलों में 30% की वृद्धि हुई है। जिसके कारण आगे जीएसटी (GST) संग्रह नई ऊंचाई पर पहुंच सकता है। टैक्स संग्रह बढ़ रहा है। जिससे सरकार को इंफ्रा (Infra) खर्च बढ़ाकर ग्रोथ को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। उम्मीद है कि अगले साल कार्पोरेट अर्निंग बहुत अच्छी आएगी। मार्केट अभी से अगले साल की अर्निंग को देख कर बढ़ रहा है। इसलिए तेजी जारी रहने के प्रबल आसार हैं। यह ‘बुल मार्केट’ (Bull Market) है। इसमें बीच-बीच में करेक्शन भी आएंगे, लेकिन वह नए निवेश के लिए खरीद असर होंगे। अब इंडेक्स (सेंसेक्स-निफ्टी) से अधिक मिड (Mid Cap) और स्माल कैप (Small Cap) कंपनियों के स्टॉक में ज्यादा तेजी की उम्मीद है। क्योंकि इन्हें घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार के प्रोत्साहनों का लाभ अधिक मिल रहा है।      

    • रंगनाथन की टॉप निवेश पिक: बैंक ऑफ बड़ौदा, ICICI बैंक, L&T, रेमंड, एक्शन कंस्ट्रक्शन