राजभवन में राज्यपाल कोश्यारी का 1 साल

  •  पेश किया एक साल का रिपोर्ट कार्ड
  •  लॉन्च की कॉफी टेबल बुक ‘जन राज्यपाल’

मुंबई. बतौर महाराष्ट्र के राज्यपाल एक साल पूरे करने के बाद ‘राज्यसेवक’ भगत सिंह कोश्यारी ने शुक्रवार को राजभवन द्वारा प्रकाशित कॉफी टेबल बुक ‘जन राज्यपाल’ का विमोचन किया, जिसमें उन्होंने अपने एक साल के कार्यकाल का लेखा जोखा प्रस्तुत किया है. विमोचन के मौके पर प्रिन्सपल सेक्रेटरी संतोष कुमार और डायरेक्टर जनरल ऑफ इनफार्मेशन एण्ड पब्लिक रिलेशन्स दिलीप पांढरपट्टे भी मौजूद थे. इसका ई-संस्करण राजभवन की वेबसाइट पर भी उपलब्ध होगा.

राज्यपाल नहीं ‘राज्यसेवक’ हूं

राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने खुद को राज्यसेवक बताया और कहा कि उनकी यायावर प्रवृत्ति ने उन्हें महाराष्ट्र के गढ़चिरौली और नंदुरबार समेत 20 जिलों का भ्रमण करा दिया है, पर कोरोना महामारी ने उस पर ब्रेक लगा दिया है. पर उनकी यह यात्रा आगे भी जारी रहेगी. पत्रकारों से खुलकर बात करते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात का संतोष है कि थोड़े दिन के राष्ट्रपति शासन काल में उन्होंने बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 8,000 रुपये की मदद दिलवाने का काम किया. उन्होंने याद करते हुए कहा कि किस तरह से वरिष्ठ अधिकारियों ने राहत की राशि को वितरित करने में अपना पूरा सहयोग दिया.इसके अलावा उन्होंने राजभवन के स्टाफ का वेतन बढ़ाने, 20 साल से मरणासन्न अवस्था में पड़ी लाइब्रेरी को पुनर्जीवित करने का काम भी किया.   

250 से ज्यादा डेलिगेशन से मिले

उन्होंने बताया कि एक साल के दौरान 250 से ज्यादा डेलीगेशन से मिले और 225 से ज्यादा कार्यक्रम भी अटेन्ड किया और अब यह फैसला किया है कि लंबित पड़ी अपील पर सुनवाई भी शुरू किया जाए. उन्होंने कहा कि जब से राज्यसेवक का कार्यभार उन्होंने संभाला है तब से एक न एक चुनौतियां आती रहीं हैं, पर उनका जीवन ऐसी ही चुनौतियों का सामना करते हुए बीता है. एक सवाल के जवाब में कि क्या वह इसी तरह हर साल अपना रिपोर्ट कार्ड पेश करेंगे, उन्होंने जवाब दिया कि हर किसी को अपने काम के प्रति जवाबदेह होना ही चाहिए. 78 वर्षीय पूर्व पत्रकार ने कहा कि उनकी इस बुक को पब्लिसिटी ना समझा जाए. विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह जैसे कार्यक्रम को अति आवश्यक बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश रही है कि ऐसे ज्यादा से ज्यादा कार्यक्रम में शरीक हुआ जाए. उन्होंने आश्चर्य व्यक्त किया कि शिवाजी विश्वविद्यालय में 16 सालों से किसी राज्यपाल ने दौरा नहीं किया.  

कोरोना से सावधानी जरूरी

कोरोना से नहीं डरने की सलाह देते हुए उन्होंने जन मानस से अपील की कि सावधानी ही मूलमंत्र है, जिसे हमें अमल में लाकर आगे बढ़ना होगा. इस सवाल पर कि जिस तरह से महाराष्ट्र संक्रमण के मामले में देश में सबसे आगे चल रहा है, क्या कोरोना से लड़ने के लिए उठाए गए राज्य सरकार के कदम को वे पर्याप्त मानते हैं, उन्होंने कहा कि सरकार की तरफ से काफी कदम उठाए गए हैं. राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने एक साल में काफी कुछ मराठी सीख ली है और इस दरमियान काम चलाऊ मराठी में उन्होंने पत्रकारों से संवाद भी किया.