अद्भुत दृश्य के साथ 6 घंटे का सूर्य ग्रहण समाप्त

– अब सबकी निगाह 5 जुलाई के चंद्र ग्रहण पर

– पवित्र नदियों में लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी

मुंबई. साल का सबसे बड़ा सूर्य ग्रहण 6 घंटे के भोग काल के साथ मोक्ष के साथ समाप्त हो गया. 6 ग्रहों के वक्री होने से जहां यह ग्रहण ज्योतिषियों के लिए कौतूहल का विषय रहा तो वहीं अपने वलयाकार (कंकणाकृति) के कारण यह ग्रहण खगोल वैज्ञनिकों के लिए शोध का विषय रहा. इस तरह का अगला सूर्य ग्रहण अब 19 साल बाद 2039 में लगेगा. 5 जुलाई को लगने वाला चंद्र ग्रहण इस साल का तीसरा चंद्र ग्रहण होगा. इससे पहले 10 जनवरी को पहला और 05 जून को दूसरा चंद्र ग्रहण लगा था. इस साल कुल चार चंद्र ग्रहण और 2 सूर्य ग्रहण समेत कुल 6 ग्रहण लगेंगे. 

साल का आखिरी और चौथा चंद्र ग्रहण 30 नवंबर को को लगेगा. जबकि साल दो सूर्य ग्रहण में से दूसरा 14 दिसंबर को लगेगा, जो पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. सूर्य ग्रहण के पवित्र मुहूर्त में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाई. नाशिक के गोदावरी में लॉक डाउन के कारण सीमित संख्या में ही लोग पहुंच सके.

शुद्धिकरण के साथ खुल गए मंदिरों के कपाट

रविवार को दोपहर बाद 3 बजे ग्रहण समाप्त होने के बाद 03:30 बजे से मुंबई के सभी मंदिरों का शुद्धिकरण कर कपाट खोल दिया गया, जिसे 12 घंटे पूर्व शनिवार को 9 बजे सूतक काल के शुरू होने के साथ बंद कर दिया गया था. हालांकि संपूर्ण कार्यक्रम सिर्फ पुजारियों की मौजूदगी में ही सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पूरा किया गया. लॉकडाउन के चलते मंदिर तीन महीने से बंद पड़े हैं.

सिद्धिविनायक गणपति मंदिर

मुंबई के प्रभादेवी स्थित प्रसिद्ध गणपति मंदिर को भी सूर्य ग्रहण के चलते शनिवार को बंद कर दिया गया था. मंदिर ट्रस्ट बोर्ड के अध्यक्ष आदेश बांदेकर ने बताया कि रविवार को ग्रहण के बाद जैसे ही सूतक काल समाप्त हुआ, पूरे मंदिर परिसर की धुलाई कर शुद्धिकरण किया गया.

झवेरी बाजार का मुंबादेवी मंदिर

मुंबई की कुलदेवी के रूप में पिछले 400 सालों से पूजित मुंबादेवी मंदिर को शनिवार की रात 9 बजे संध्या आरती के बाद बंद कर दिया गया था. रविवार को ग्रहण के मोक्ष काल के बाद वैदिक विधि विधान से शुद्धिकरण किया गया उसके बाद कपाट खुले. मंदिर के प्रबंधक हेमंत जाधव ने बताया कि सोमवार से गुप्त नवरात्रि का अनुष्ठान चलेगा.

महालक्ष्मी माता मंदिर

मुंबई और मुंबईकरों पर कोष की कृपा करने वाली महालक्ष्मी माता मंदिर के कपाट भी शनिवार को सूतक काल से पूर्व ही बंद कर दिए गए थे. रविवार को ग्रहण के मोक्ष काल के बाद गर्भ गृह का शुद्धिकरण किया गया. मंदिर के मुख्य प्रबंधक शरदचन्द्र पाध्ये के अनुसार लॉक डाउन के कारण मंदिर पिछले 3 महीने से बंद है. सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शुद्ध किया गया. सोमवार से गुप्त नवरात्रि का अनुष्ठान चलेगा.

ग्रहण काल में नहीं बंद होते 2 मंदिरों के कपाट

देश विदेश में जब भी सूर्य या चंद्र ग्रहण लगते हैं सभी मंदिरों के गर्भगृह के कपाट सूतक काल से पूर्व बंद कर दिए जाते हैं, लेकिन दो ऐसे विशिष्ट मंदिर हैं जिनके कपाट ग्रहण काल में भी खुले  रहते हैं. लेकिन इन मंदिरों के विग्रह का स्पर्श वर्जित रहता है. बिहार के गया जिले में स्थित विष्णुपद मंदिर तथा उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में ग्रहण काल में भी कपाट बंद नहीं होता. ऐतिहासिक विष्णुपद मंदिर के कपाट सूतक काल व ग्रहण काल में बंद नहीं किए जाते, बल्कि इस दौरान सनातन धर्म को मानने वाले श्रद्धालु मंदिर परिसर में विशेष रूप से अपने पितरों के लिए पिंडदान करते हैं और उसे विष्णुचरण पर उन्हें अर्पित करते हैं. विष्णुपद मंदिर एक वेदी के रूप में प्रतिष्ठित है जहां देश-विदेश के सनातन धर्म के मानने वाले लोग सालों भर अपने मृत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करने आतें हैं. उज्जैन के महाकाल मंदिर में यहां सूतक का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है. हालांकि ग्रहण के समय न तो कोई शिवलिंग को स्पर्श कर सकता है और न ही इस समय पूजा-पाठ और भोग लगाया जाता है.