पंकजा मुंडे ने अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा, “धर्मयुद्ध’’ का समय अभी नहीं आया है

    मुंबई. केंद्र की मोदी सरकार में अपनी बहन प्रीतम मुंडे (Pritam Munde) को मंत्री न बनाए जाने से नाराज चल रही बीजेपी नेता (BJP Leader) और पूर्व मंत्री (Former Minister) पंकजा मुंडे (Pankaja Munde) ने मंगलवार को अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए जम कर भड़ास निकाली। प्रीतम, को मोदी कैबिनेट में जगह नहीं मिलने के विरोध में बीड जिले से बीजेपी के कई पदाधिकारियों ने इस्तीफा दे दिया था। पंकजा ने इस बात से इनकार किया कि वह केंद्रीय नेतृत्व पर दबाव बनाने की किसी तरकीब का इस्तेमाल कर रही हैं।   

    “धर्मयुद्ध” का समय अभी नहीं आया है

    पंकजा मुंडे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा को अपना नेता बताते हुए उनकी सराहना की, लेकिन साथ ही पार्टी के अंदर  खुद को पांडव बताते हुए कौरवों के साथ लड़ाई का भी जिक्र कर दिया।  पंकजा ने पौराणिक महाकाव्य महाभारत का हवाला देते हुए कहा कि धर्मयुद्ध’’का समय अभी नहीं आया है। उन्होंने यह कह कर भी अपने विरोधियों पर निशाना साधा कि किस तरह पांडवों की उचित मांग को कौरवों ने खारिज कर दिया था। अब पंकजा के इस बयान से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पार्टी के अंदर उन्होंने किन नेताओं को कौरव बता कर अपनी धर्मयुद्ध की लड़ाई की बात कह रही हैं।

    जब तक पार्टी में भगवान राम हैं

    जब तक पार्टी में भगवान राम, तब तक पंकजा ने साफ़ तौर से कहा कि मैं उस स्थान पर तब तक काम करना चाहुंगी जब तक कि वहां भगवान राम हैं। यदि राम नहीं है तो मै सोंचूंगी कि क्या करना है।  उन्होंने अपने इस बयान से साफ़ कर दिया है कि यदि बीजेपी के अंदर उनके साथ न्याय नहीं होता है तो वे अन्य विकल्पों पर विचार कर सकती है। मैं अभी खत्म नहीं हुई हूँ, पंकजा ने अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वे भले ही साल 2019 में विधानसभा का चुनाव हार गई हो, लेकिन उनकी ताकत अभी खत्म नहीं हुई है।  उन्होंने कहा कि मेरे कार्यकर्ता ही मेरी असली ताकत हैं। 

    पंकजा ने रविवार को दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय सचिवों की बैठक में शामिल हुई थी।  जहां  पार्टी अध्यक्ष जे. पी. नड्डा से मुलाक़ात करने के बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की थी। क्यों नहीं लिया देवेन्द्र का नाम पंकजा के संबोधन के बाद जब संवाददाताओं ने उनसे पूछा कि उन्होंने अपने नेता के तौर पर पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल का नाम क्यों नहीं लिया तो उन्होंने कहा कि मैं राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रही हूं और इसलिए मेरे नेता मोदी, शाह और नड्डा हैं।