मुंबई को विश्वस्तरीय शहर बनाने में जर्जर इमारतें और स्लम बड़ी बाधा

  • पुनर्निर्माण के लिए तैयार बिल्डर्स एसोसिएशन
  • महाराष्ट्र सरकार को भेजा प्रस्ताव
  • 14,250 जर्जर इमारतें, 1500 SRA परियोजनाएं लम्बित

मुंबई. देश की आर्थिक राजधानी को विश्वस्तरीय शहर बनाने के लिए केंद्र एवं राज्य सरकार विगत कई वर्षों से लगातार प्रयास कर रही हैं, लेकिन इसमें एक सबसे बड़ी बाधा मायानगरी के विभिन्न इलाकों में फैली झोपड़पट्टियां और हजारों जर्जर इमारतें हैं, जिनका पुनर्निर्माण कार्य वर्षों से अटका हुआ है या फिर धीमी गति से आगे बढ़ रहा है. इन लंबित परियोजनाओं के काम में तेजी लाने के लिए बिल्डर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (बीएआई) ने महाराष्ट्र सरकार को सहयोग की पेशकश की है. 20,000 सदस्यों वाली कंस्ट्रक्शन सेक्टर की सर्वोच्च संस्था ‘बीएआई’ ने14,250 जर्जर इमारतों के पुनर्निर्माण और 1500 एसआरए परियोजनाएं को साझा तौर पर पूरा करने के लिए महाराष्ट्र सरकार के पास एक लिखित प्रस्ताव भेजा है.

किराएदार, डेवलपर, वित्त संस्थाओं में आपसी भरोसे की कमी

बीएआई ने इस प्रस्ताव के जरिए महाराष्ट्र सरकार को बताया है कि वो अधूरी पड़ी योजनाओं को पूरा करने के  लिए राज्य सरकार को अपने कॉन्ट्रैक्टर मुहैया कराने के लिए तैयार है ताकि अधूरी पड़ी ऐसी तमाम परियोजनाओं को जल्द से जल्द पूरा किया जा सके. महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और गृह निर्माण मंत्री जीतेंद्र आव्हाड को लिखे पत्र में बीएआई ने कहा है कि अगर उनके इस प्रस्ताव को मान लिया जाता है तो जल्द ही मुंबई ना सिर्फ स्लम मुक्त हो जाएगी, बल्कि जर्जर खतरनाक इमारतों की चिंता भी दूर हो जाएगी. बीएआई के शोध से पता चलता है कि किराएदारों, डेवलपरों और वित्त संस्थाओं में आपसी भरोसे की काफी कमी है. यही वजह है कि जर्जर इमारतों के रिडेवलपमेंट और झोपड़पट्टी पुनर्वास से जुड़ी परियोजनाएं 25 से 30 वर्षों से अटकी पड़ी हैं.

सरकारी एजेंसियों पर है लोगों को भरोसा

एसोसिएशन को शोध से पता चलता है कि म्हाडा, एमएमआरडीए, सिडको जैसी सरकारी एजेंसियां जिस किसी परियोजना में शामिल होती हैं,तो वहां अविश्वास का माहौल खत्म हो जाता है और ऐसी परियोजनाएं समय रहते पूरे भी हो जाती हैं. इसी के मद्देनज़र हमने अपना प्रस्ताव महाराष्ट्र सरकार को भेजा है. अगर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया जाता है, तो इससे लाखों लोगों को फायदा होगा. यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिल जाती है तो बीएआई के 20,000 सदस्य मुंबई की जर्जर इमारतों के पुनर्निर्माण व झोपड़पट्टी पुनर्वास परियोजनाओं को पूरा करने की जिम्मेदारी लेने के लिए तैयार हैं.

मंदी से उबारने, रोजगार बढ़ाने में मिलेगी मदद

“बीएआई इस प्रस्ताव के जरिए ना ही किसी आर्थिक लाभ की अपेक्षा रखती है और ना ही वह डेवलपमेंट के नियमों में बदलाव की मांग कर रही है. पुनर्निर्माण के बाद सरकारी एजेंसियां बिक्री योग्य घरों को बेचने और उससे आर्थिक लाभ कमाने के लिए भी स्वतंत्र होंगे. ऐसे में किराएदार, मकान मालिक, रहिवासी और सरकार सहित सभी हितधारकों को इन परियोजनाओं से लाभ मिलेगा. साथ ही कोरोना संकट के कारण मंदी की चपेट में आए कंस्ट्रक्शन सेक्टर के विकास और रोजगार बढ़ाने में मदद मिलेगी.” -मोहिंदर रिजवानी, मुंबई अध्यक्ष, BAI  

60 लाख लोगों को होगा फायदा

“सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, डेवलपमेंट कंट्रोल रूल 33 (7) की ए, बी और सी श्रेणियों के तहत जर्जर इमारतों की संख्या 14,250 है. सेस संबंधित कानून के 29 वर्षों बाद भी और जरूरी फंड की व्यवस्था होने के बावजूद भी इनके पुनर्निर्माण के लिए अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका है. जबकि डीसीआर 33 (10) के तहत 1500 झोपड़पट्टी परियोजनाएं हैं, जिनमें 14 लाख झुग्गियों का शुमार है. जिनमें करीब 60 लाख लोग निवास करते हैं. झोपड़पट्टी संबंधित परियोजनाएं विभिन्न कारणों से लम्बित पड़ी हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है कि झुग्गियों में रहने वाले लोगों का मौजूद व्यवस्था में भरोसा ना होना है.” -आनंद गुप्ता, अध्यक्ष, BAI हाउसिंग एवं रेरा कमेटी