बीएमसी ने निजी सुरक्षा गार्ड का प्रस्ताव वापस लिया

  • बीजेपी ने भ्रष्टाचार के लगाए थे गंभीर आरोप

मुंबई. बीएमसी प्रशासन ने भाड़े पर निजी सुरक्षा गार्ड लेने के अपने निर्णय को वापस ले लिया है. इससे पहले बीएमसी में बीजेपी पार्टी नेता विनोद मिश्र ने 40 करोड़ रुपये का घोटाला किए जाने के गंभीर आरोप लगाए थे. यह प्रस्ताव बीएमसी स्थायी समिति में लिस्टेड था जिसे हटाने का आदेश बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने दिया है.

बीएमसी प्रशासन ने अपनी प्रॉपर्टी की सुरक्षा को लेकर 3 साल के लिए 3000 सिक्युरिटी गार्ड किराये पर लेने का निर्णय लिया था, जिस पर 3 साल में 222 करोड़ रुपये खर्च आने की संभावना जताई थी. मनपा के खुद के 3,500 सुरक्षा रक्षक होने के बावजूद निजी सुरक्षा गार्ड की सेवाएं लेने को लेकर बीजेपी ने सवाल खड़ा किया था. बीएमसी प्रशासन ने वर्ष 2019 में भी सिक्युरिटी गार्ड भाड़े पर लेने का निर्णय लिया था उस दौरान किसी विशेष कंपनी को ठेका देने के लिए तत्कालीन अतिरिक्त आयुक्त विजय सिंघल ने ठेका पाने वाली कंपनी को इसलिए ठेका नहींं दिया था. 

647 प्रस्तावों में शामिल था निजी सुरक्षा रक्षक का प्रस्ताव

गौरतलब है कि कोरोना के कारण पिछले 6 महीने से रुके कार्यो के लिए एक मुश्त लाये गए 647 प्रस्ताओं में से निजी सुरक्षा रक्षक का भी प्रस्ताव एक था. इस बार भी निजी सुरक्षा रक्षक ठेका प्रक्रिया में 2 ठेकेदार के सहभागी होने के बावजूद मनपा ने ईगल कंपनी को ठेका देने का निर्णय लिया था. बीजेपी गुट नेता प्रभाकर शिंदे ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने जानकारी दिए बिना सीआईएस ब्यूरो का ठेका रद्द कर दिया है, जिससे मनपा को लगभग 40 करोड़ का नुकसान उठाना पड़ेगा.  भाजपा नेता के विरोध के बाद मनपा आयुक्त इकबाल सिंह चहल ने सुरक्षा रक्षक के ठेके को रद्द करने का पत्र स्थायी समिति को भेजा है.  जिस पर स्थायी समिति की 29 अक्टूबर को होने वाली बैठक में समिति निर्णय लेगी. मनपा ने इस बार तीन साल के लिए 370 करोड़ का ठेका दिया हुआ था.