corona

  • 30 दिन में 88 फीसदी की वृद्धि
  • बुजुर्गों पर संक्रमण का संकट कायम
  • बच्चों और युवा वर्ग में भी तगड़ी उछाल 

सूरज पांडेय

मुंबई. महाराष्ट्र में कोरोना ने काफी तेज रफ्तार पकड़ ली है. महज 30 दिन में कोरोना के मामले में 88 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है. स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों का आंकलन करें तो सभी आयु वर्ग में 80 फीसदी से ज्यादा केसेस बढ़े हैं, लेकिन युवा वर्ग और बुजुर्गों की संख्या में इजाफा 90 प्रतिशत से भी अधिक है. बच्चों की संख्या में भी 80 फीसदी की उछाल दर्ज की गई है. रोगियों की बढ़ती संख्या कहीं न कहीं चिंता विषय जरूर है.

कोरोना के मामले में राज्य रोजाना एक रिकॉर्ड स्थापित कर रहा है. जहां 15 अगस्त तक राज्य में 5 लाख 72 हजार 138 लोग कोरोना से संक्रमित पाए गए थे,वहीं 15 सितंबर तक यह आंकड़ा 10 लाख 76 हजार 601 तक पहुंच गया है. आंकड़े साफ दर्शाते हैं कि महज 30 में कोरोना से संक्रमित होने वालों की संख्या में 88 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है. 

लापरवाही परेशानी का सबब बन रही 

स्वास्थ्य विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि जब से लॉकडाउन में छूट मिली है लोगों की यह धारणा बन गई है कि जो होगा देखा जाएगा. इस सोच के चलते संख्या में बढ़ोत्तरी हो रही है. लोगों की ओर से बरती जा रही लापरवाही परेशानी का सबब बन रही है. डायरेक्टरेट आफ हेल्थ सर्विसेज की डॉ. अर्चना पाटिल ने बताया कि लॉकडॉन में छूट के बाद लोगों का बाहर आना-जाना शुरू हो गया है. अन्य राज्यों से भी लोग राज्य में लौट रहे हैं. त्यौहारों में भी लोगों का एक जिले से दूसरे जिले का प्रवास बढ़ गया. ऐसे में संक्रमण से बचने के लिए आवश्यक नियमों जैसे मास्क पहनने, सोशल डिस्टेंसिंग और सेनिटाइजेटशन न करना संक्रमण के खतरे को बढ़ा रहा है.

अभिभावकों से संक्रमित हो रहे बच्चे

स्वास्थ्य विभाग से मिले आंकड़ों पर नजर डाले तो 0 से 10 आयु वर्ग के कोरोना से संक्रमित होने वाले बच्चों की संख्या 15 अगस्त तक 23 हजार 5 थी. जबकि 15 सितंबर को यह आंकड़ा बढ़कर 41 हजार 802 तक पहुंच गया.कोरोना से संक्रमित होने वाले बच्चों की संख्या में 81.70 प्रतिशत का इजाफा एक महीने में हुआ है.केईएम अस्पताल के बाल रोग विभाग के प्रमुख डॉ. मुकेश अग्रवाल ने नवभारत को बताया कि अभिभावक ही बच्चों को संक्रमित कर रहे हैं. दरअसल अप्रैल, मई में टोटल लॉकडाउन के कारण अभिभावक घर से नहीं निकलते थे. जून, जुलाई में धीरे-धीरे लोग बाहर निकलने लगे और अब लॉकडाउन में छूट के बाद लोग कामकाज के लिए बाहर निकल रहे हैंं. ऐसे में वे खुद संक्रमित हो रहे हैंं और फिर घर जाने के बाद अनजाने में ही सही बच्चे भी उनके संपर्क में आकर संक्रमित हो रहे हैं. इसलिए अभिभावक तबियत नरम लगे तो बच्चों से दूरी बनाएं  और घर में भी मास्क पहन कर रहें. यदि बच्चे संक्रमित हो भी जाते हैंं तो घबराए नहीं, तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें.बच्चों में माइल्ड लक्षण होते हैं तो परेशान न होंं बस सावधानी बरतें.