कोरोना से संघर्ष करुणा के साथ

मुंबई. मुंबई बीजेपी के विधान परिषद सदस्य प्रसाद लाड़ ऐसे व्यक्ति हैं जिन्होंने कोरोना वायरस से उपजे संकट के समय दलगत राजनीति से उपर उठकर लोगों की सहायता के पूरी शिद्दत से लगे हुए थे. जब अधिकांश नेता खाने के 2 पैकेट बांटने पर भी फोटो खिंचकर चमकने का कोई अवसर नहीं छोड़ रहे थे ऐसे में लाड ने कोरोना से संघर्ष करुणा के नारे के समाज सेवा में जुटे रहे. इस संदर्भ में नवभारत ने उनसे बातचीत कर जाना कि उनकी करुणा  कितने लोगों तक पहुंची.

कोरोना संकट के समय आपका योगदान क्या था?

लॉकडाउन की घोषणा के शुरुआत में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी कार्यकर्ताओं से लोगों की मदद में जुटने के लिए कहा, उससे पहले हम गरीब 200 गरीब मजदूरों को भोजन देना शुरू कर दिए थे बाद में यह बढ़ कर प्रतिदिन 5000 पर पहुंच गया. 

आपकी सहायता का दायरा सीमित था?

मुंबई के अलावा ठाणे, रायगड, रत्नागिरी, जहां से मदद मांगी गई हमने सहायता पहुंचाई. धारावी, वडाला, चेंबूर, दहिसर तक लोगों को राशन के किट भिजवाये. जिसमें 1 महीने का पर्याप्त राशन था. ट्रकों में भर कर 3 हजार टन अनाज, डेढ़ हजार टन से ज्यादा सब्जियों का वितरण, कोरोना से परेशान परिवारों तक पहुंचाया.

कोरोना वारियर्स की क्या मदद की?

उनकी मदद पहले भी किए थे अब भी जारी है. 10 हजार पीपीई किट, 10 हजार एन-95 मास्क, 10 लाख कपडे का मास्क आम नागरिकों में बंटवाये, स्लम की महिलाओं को बड़ी संख्या में सेनेटरी पैड भिजवाये, पुलिस वालों को मास्क, हैंड सेनेटाइजर दिए. 

आपने पशुओं के लिए भी किचन शुरू किया था?

कोरोना के करण पशु-पक्षी भी मुसीबत में थे. अंत्योदय प्रतिष्ठान, वी मुंबई अभियान के बैनर तले हमने उनके लिए अलग से किचन की व्यवस्था की है जहां अब भी कुत्ते हों या बिल्ली खाना लेकर हमारे लोग जगह-जगह जाकर खाने के लिए रखते हैं. साथ में पक्षियों को भी अनाज डाला जाता है. 

मुंबई में सवास्थ्य सुविधाएं चरमरा गई हैं इस पर आपकी क्या राय है.

कोरोना मरीज बढ़ने के साथ स्वास्थ्य सुविधाओं पर बड़ा असर पड़ा है. सरकार कोरोना कंट्रोल करने में नाकाम हो रही है. आईसीएमआर और केंद्र सरकार भी मदद कर रही है. हमने अपनी तरफ से गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने लाने के लिए 25 गाडियों की व्यवस्था की है. जो भी फोन करता है उसे तुरंत मदद दी जाती है.