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  • कोविड अस्पतालों में विशेषज्ञ की नियुक्ति का असर

मुंबई. कोरोना वायरस संक्रमण की शुरुआत से ही कोरोना मरीजों की मृत्युदर के मामले में सबसे आगे रहने वाली मुंबई में मौतों की संख्या कम करने में बीएमसी और स्थानीय प्रशासन को उल्लेखनीय कामयाबी मिली है. 5 महीने के बाद बीते 31 दिनों में मृत्युदर 2.2% रही, जो अब तक 5.5 प्रतिशत और फिर 4.6 प्रतिशत के आसपास थी. बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल ने बताया कि 20 अगस्त से 20 सितंबर तक इन 31 दिनों में मृत्युदर 2.2% पर लाने में सफलता मिली है. माना जा रहा है कि कोविड को कंट्रोल करने के लिए किये गए उपाय काफी कारगर साबित हो रहे हैं जिनमे से एक उपाय कोविड अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा लेना भी शामिल है.

डेथ रेट हर सप्ताह बारीक निरीक्षण करने का निर्णय किया

कमिश्नर ने बताया कि मृत्युदर को कम करने के लिए अनेक प्रयास किए जाने के बाद भी कमी नहीं आ रही थी इसलिए डेथ रेट हर सप्ताह बारीक निरीक्षण करने का निर्णय किया. हर सोमवार को सभी सरकारी, बीएमसी, निजी अस्पतालों में होनेवाली मौतों पर निगरानी रखनी शुरू की जिसका परिणाम मृत्युदर में कमी के रुप में सामने आया. सख्त निगरानी के कारण रोजाना हो रही मौतों में कमी आने के साथ ही मृत्युदर भी घटने लगी. यह ऐसे समय में हुआ है जब प्रतिदिन जांच की संख्या बढ़ी है और केस भी पहले की अपेक्षा कहीं अधिक आ रहे हैं.

मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ी

कमिश्नर ने बताया कि जांच का दायरा बढ़ाने से नये कोरोना मरीजों की संख्या प्रतिदिन 1000 से 2000 तक बढ़ गई है. उसके बाद भी रविवार तक हमारे पास 4777 कोविड बेड और 271 आईसीयू बेड रिक्त हैं. बीएमसी के सभी 24 वॉर्ड वॉर रुम की तरफ से मरीजों की देखरेख, उनके स्वास्थ्य का समाचार लेने का बेहतर प्रबंधन किया जा रहा है.

78 अस्पतालों में 15,413 बेड

मुंबई में कोरोना मरीजों को रखने के लिए बनाये गए जंबो कोविड सेंटरों में प्राइवेट अस्पतालों ब्रीच कैंडी बांबे अस्पताल, हिंदुजा, लीलावती, नानावटी, फोर्टिस के मशहूर विशेषज्ञ डॉक्टर्स की पिछले सप्ताह से मरीजों के उपचार के लिए सेवाएं ली जा रही हैं. मुंबई में एक सप्ताह के दौरान 2200 से अधिक नये मरीज रोज  मिल रहे हैं. रविवार तक कुल मरीजों की संख्या 1 लाख 84 हजार 439 थी जिसमें से 1 लाख 47 हजार 807 मरीज ठीक हो चुके हैं जबकि 8469 मरीजों की कोरोना से मौत हो चुकी है. रिकवरी रेट 80% पर पहुंच गया है. अब मृत्युदर में कमी आने से लोग राहत की सांस ले सकेंगे. मुंबई में कोविड समर्पित 78 अस्पतालों में 15,413 बेड हैं. बीएमसी डैसबोर्ड के अनुसार 20 सितंबर तक संदिग्ध मरीजों के लिए 717 बेड में से 215 बेड रिक्त हैं. इसी तरह पॉजिटिव मरीजों के लिए कुल बेड 8088 में से 2613 रिक्त पड़े हैं. 2047 आईसीयू बेड में से 271 बेड खाली हैं.

बुजुर्गों की ज्यादा स्क्रीनिंग और टेस्टिंग 

गौरतलब है कि केईएम अस्पताल के पूर्व डीन और कोविड से होने वाले मौतों की ऑडिट करने वाली कमेटी के प्रमुख डॉ अविनाश सुपे ने कहा था कि हम धीरे-धीरे मुंबई में और आसपास के क्षेत्रों में मृत्यु दर कम करने में कामयाब हुए हैं क्योंकि अब हमारा ट्रीटमेंट पैटर्न और टास्क फोर्स द्वारा सुझाए गए माड्यूल अब ठीक ढंग से काम करने लगे हैं. अब सभी लोगों, खासकर बुजुर्गों की ज्यादा स्क्रीनिंग और टेस्टिंग होने लगी है और कुछ नर्सिंग होम में जहां ज्यादा मौतें होती थी, अब उन्हें बंद कर दिया गया है. सुपे ने कहा था कि अगर मृत्यु दर 2% से 3% के बीच में भी रहती है हमारे लिए यह एक प्रकार से कामयाबी है क्योंकि बहुत सारे मरीजों को अन्य बीमारियाँ भी रहती है.

 बीएमसी की हुई तारीफ

 मृत्युदर पर काबू पाने पर बीएमसी की तारीफ करते हुए सीनियर फिजीशियन और मैनेजमेंट कंसल्टेंट डॉ आशीष तिवारी ने बीएमसी कमिश्नर इकबाल सिंह चहल और उनकी टीम की बढाई दी है. उन्होंने कहा कि मुंबई में जिस तेजी से हेल्थकेयर इंफ़्रास्ट्रक्चर बढ़ाया गया, नये डाक्टर्स और स्वास्थ्यकर्मी बढ़ाये गये, निजी अस्पतालों को साथ में जोड़ा गया और सबसे जरूरी बात कि कोविड के गोल्ड स्टैंडर्ड टेस्ट आरटी-पीसीआर को ही केन्द्र में रखकर पारदर्शी और ईमानदार तरीके से लगातार जाँचें की गयी और पाजिटिव रोगियों को समय पर उपचार उपलब्ध कराया गया, यह उसी का परिणाम है. बीएमसी की ईमानदार कोशिश रंग लाई है और जो कोविड कुछ महीने पहले आउट आफ कंट्रोल लग रहा था, वो अब नियंत्रण में दिख रहा है.