पैदल पलायन करने वाले मजदूरों के आए ‘अच्छे दिन’

  •  मुलुक से फ्लाइट के जरिए कर रहे वापसी
  • उद्योग और भवन निर्माण क्षेत्र के कंपनी मालिक दे रहे ऑफर
  • उत्तर भारत से आने वाले विमानों में 80% मजदूर

अरविंद सिंह

मुंबई. कोरोना महामारी में हर तरफ हाहाकार मचा हुआ है तो कुछ ऐसे भी क्षेत्र हैं, जहां मुफ्त का आनंद भी मिल रहा है. आजकल उद्योगों, भवन निर्माण और सार्वजनिक निर्माण क्षेत्र की परियोजनाओं के कार्यों में तेजी आ गई है. इसलिए मजदूरों की सख्त आवश्यकता पड़ने लगी है. लॉकडाउन के शुरुआती चरण में मुंबई से बड़ी संख्या में मजदूरों ने पलायन किया था. अब उसके उलट यहां तक नौबत आ गई है कि इंडस्ट्री और बिल्डिंग लाइन में मजदूरों का अभाव हो गया है. इसके चलते कई कंपनियां मजदूरों को हवाई जहाज से बुला रही हैं. ऐसे में जो मजदूर गांव जाने के लिए बस, ट्रेन के लिए तरस गए थे और पैदल ही गांव जाने को विवश हुए थे, उन मजदूरों की फ्लाइट से वापसी हो रही है. टिकट बुक करने वाली ट्रैवल कंपनियों को भी इससे अच्छी कमाई हो रही है.

सोना बेचकर फ्लाइट की बुकिंग

ट्रैवल एजेंटों का कहना है कि ऐसे भी मजदूर हैं जो लॉकडाउन में गांव चले गए, वे पुनः मुंबई आना चाहते हैं, लेकिन ट्रेनों में टिकट न मिलने से वे फ्लाइट से आ रहे हैं. इसके लिए मजदूर सोना बेंंच कर अथवा उधार लेकर फ्लाइट का टिकट बुक करा रहे हैं. एजेंटों के अनुसार उत्तर भारत, खासकर पटना, रांची, बनारस, इलाहाबाद, गोरखपुर आदि क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों में 80% मजदूरों की संख्या होती है. 

स्पेशल फेयर बुकिंग जोरों पर

ताज ट्रैवल्स के प्रोपराइटर प्रकाश शर्मा ने बताया कि उत्पादन और निर्माण कार्य में तेजी आने से मजदूरों की मांग बढ़ी है. कंपनियां उत्तर भारत के कई शहरों से बड़ी संख्या में मजदूरों को वापस बुला रही हैं. उन्होंने कहा कि उनकी फ्लाइट बुकिंग में अब ज्यादा संख्या मजदूरों की होती है.औसतन 5 से 7 यात्री मजदूर वर्ग के होते हैं. शर्मा ने कहा कि इस समय स्पेशल फेयर बुकिंग के जरिए कम से कम 3 दिन पहले तक टिकट बुक करने पर पटना का टिकट सिर्फ 5,200 से 5,500 रुपए है, जिसका वास्तविक रेट 9,000 रुपए है. बनारस का टिकट 4,800 से 4,900 रुपए तक है. जबकि वहां का वास्तविक रेट 8000 रुपए है. ऐसे ही गोरखपुर की 3 दिन पहले तक बुकिंग सिर्फ 6,000 रुपए में हो रही है, जबकि वास्तविक रेट 8,650 रुपए है.

महंगे टिकटों की परवाह नहीं

फ्यूचर टूर्स एंड ट्रैवल्स के प्रोपराइटर कुणाल मेहता ने कहा कि इस समय बहुत सी कंपनियों के मालिक अपने उन मजदूरों को बुलाने पर ज्यादा जोर दे रहे हैं, जो विशेष रूप से कंपनी में उन्हीं (मजदूरों) के द्वारा कार्य हो सकते हैं. इसके अलावा अन्य मजदूर जो भवन निर्माण और उद्योगों में कार्यरत थे, उन्हें भी जरूरत के हिसाब से फ्लाइट के जरिए बुलाया जा रहा है. इसके लिए कंपनी के मालिक महंगे टिकटों की भी परवाह नहीं कर रहे हैं. पटना से मुंबई तक 10,000 रुपए खर्च कर बुकिंग किए जा रहे हैं. इसी तरह बनारस से मुंबई के लिए 8,500 रुपए खर्च किए जा रहे हैं.

55% से 60% मजदूर यात्री

सफर ट्रैवल्स ऑनलाइन के मुकेश राम ने बताया कि इस समय उनके ट्रेवल्स में उत्तर भारत से आने वाले यात्रियों में 55% से 60% यात्री लेबर वर्ग के होते हैं. उन्होंने कहा कि इन मजदूरों की ‘स्पेशल फेयर बुकिंग’ में सस्ते टिकट के जरिए वापसी की जा रही है. इनकी बुकिंग बहुत पहले की गई थी.