हिल गैंग- मध्य रेल घाटों के संरक्षा सैनिक

साल भर चलता है ट्रेन सेफ्टी मिशन

मुंबई. देश के सबसे दुर्गम रेल घाटों में शुमार मध्य रेल के कर्जत- खंडाला के बीच भोर घाट और कसारा-इगतपुरी के बीच थल घाट की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण कार्य है. रॉक क्लाइम्बिंग और माउंटेन रैपलिंग के माध्यम से रेलवे संरक्षा का यह कठिन कार्य मध्य रेलवे का हिल गैंग वर्ष भर करता है.

 पहाड़ की कटाई में अपनी विशेषता से हिल गैंग के सदस्यों द्वारा पटरियों पर गिरने की संभावना वाले ढीले और खतरनाक बोल्डर को हटाने, मानसून के दौरान भूस्खलन की संभावना को टालने, कीचड़ साफ करने, भूजल निकासी आदि कार्यो में मदद होती है. हिल गैंग के सदस्य पटरियों के साथ ऊंचे और खड़ी पहाड़ियों पर चढ़ते हैं, रैलिंग के माध्यम से ढीले और कमजोर बोल्डर की पहचान करते हैं.

अलग-अलग चरण में होता है कार्य

यह कार्य अलग-अलग चरण में होता है.पहले जनवरी से मार्च के महीने में लाल पेंट से चिह्नित करते हैं, फिर, अप्रैल और मई के महीने में वे प्रत्येक दिन 4 से 5 घंटे का ब्लॉक लेकर चिह्नित ढीले और कमजोर बोल्डर को हटा देते हैं. इन बोल्डरों को विशेष रूप से साफ किया जाता है. इस वर्ष अकेले भोर घाट और थल घाट दोनों घाटों  में 650 से अधिक ढीले बोल्डर की पहचान की गई और ड्राप कर दिया,60 दिनों के लिए 4-5 घंटे का  ब्लॉक लेकर 3-वैगन में बोल्डर को साफ कर दिया गया.यह अत्यंत कठिन कार्य भोर घाट और थल घाट में 10 हिल गैंग के सदस्यों ने पूरा किया.इसके लिए उन्हें सुरक्षा गियर, उपकरण, सुरक्षा हेलमेट, सुरक्षा जूते, सुरक्षा बेल्ट (दोहन), दूरबीन,100 मीटर रस्सी,हाथ के दस्ताने,सुरक्षा जैकेट,कटवानी, पहर,फोंक, लाल पेंट,ब्रश, प्राथमिक चिकित्सा बॉक्स आदि प्रदान किए जाते हैं.

रेलवे की संरक्षा के मिशन में लगे रहते हैं

5 किग्रा, वजन का हथौड़ा विभिन्न आकार, कौवा बार, सीटी थंडर,छेनी, विभिन्न आकारों में कुल्हाड़ी,तार पंजा,हाथ संकेत झंडा लाल- हरा, फावड़ा,जाम बावटा और गमेला का भी उपयोग होता है. मानसून के दौरान और उसके बाद हिल गैंग के सदस्य बिखरे हुए ढीले बोल्डर को स्कैन करने और आवश्यकता के अनुसार छोड़ने का काम करते हैं.चोक-अप कैच वाटर ड्रेन और पुलिया,लीन ट्री कटिंग और ब्रिज की सफाई  करते हैं.महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट की सह्याद्रि पर्वत शृंखला  में कई  ’घाट’ हैं,जिनमें से भोर और थल घाट प्रमुख हैं.देश के उत्तर और दक्षिणी इलाकों से इन घाटों  से होकर गाड़ियां मुंबई आती जाती हैं.भारी बारिश के दौरान खड़ी ढलानों का कटाव होता है, जिससे भारी बोल्डरों को लुढ़कने का खतरा रहता है और छोटे-छोटे बोल्डर ढीले हो जाते हैं. हिल गैंग द्वारा छेनी और हथौड़ों की मदद से बड़े बोल्डरों को टुकड़ों में काट कर साफ करते हैं.पर्वतारोहियों के लिए रैपलिंग एक साहसिक कार्य है,जबकि मध्य रेल हिल गैंग के जवान वजनी सामान के साथ  रेलवे की संरक्षा के मिशन में लगे रहते हैं.