बिना ‘लाइफलाइन’ कैसे चलेगी  मुंबई!

  • सभी के लिए लोकल चलाने बढ़ रहा दबाव

मुंबई. मुंबई में अनलॉक के बाद लोकल को भी आम लोगों के लिए शुरू किए जाने का दबाव लगातार बढ़ रहा है. पिछले साढ़े 6 महीनों से आम लोगों के लिए मुंबई लोकल ठप है. 

राज्य सरकार के अनलॉक की घोषणा के बाद मुंबई और उपनगरों में सड़क से लेकर सार्वजनिक वाहनों में भीड़ बेकाबू हो रही है. इन परिस्थितियों में मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों को आम यात्रियों के लिए शुरू किए जाने को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ने लगा है.

अत्यावश्यक कर्मियों के लिए चल रही 929 लोकल

मध्य और पश्चिम रेलवे अत्यावश्यक कर्मचारियों के लिए लोकल चला रही है. लॉकडाउन के पहले मुंबई में लोकल की 3 हजार से ज्यादा फेरियां होती थी, लेकिन इस समय अत्यावश्यक कर्मचारियों के लिए 929 फेरियां चल रही हैं.

मुंबई अनलॉक,लोकल लॉक

यात्री संगठन आम लोगों के लिए लोकल चलाने की मांग कर रहे हैं. कामकाजी यात्रियों का कहना है कि जब मुंबई अनलॉक हो रही है, तो आम यात्रियों के लिए लोकल को लॉक करना उचित नहीं है. रेल प्रवासी संघ के पूर्व पदाधिकारी मनोहर शेलार के अनुसार मुंबई में लोकल के अलावा यातायात का दूसरा कोई सस्ता और सुलभ विकल्प नहीं है. अब कामकाजी लोग अपने घरों से कार्यस्थल पर जाने के लिए निकल रहे हैं, लोकल की बजाय उन्हें बस या अन्य वाहनों से  यात्रा करनी पड़ रही है.इस यात्रा में ज्यादा पैसा और समय दोनों लग रहा है. यात्री सेवा सुविधा संगठन के अध्यक्ष पारसनाथ तिवारी ने कहा कि समय और पैसे के अभाव में पर काम पर न पहुंचने की वजह से लोगों की नौकरियां जा रहीं हैं. आम लोगों के लिए तत्काल लोकल न शुरू हुई तो भूखों मरने की नौबत आ जाएगी.

बसों में भी नहीं हो रही सोशल डिस्टेंसिंग

कई कामकाजी यात्रियों का कहना है कि बिना ‘लाइफलाइन’ मुंबई कैसे चल पाएगी. वैसे उपनगरों से लेकर मुंबई तक बसों और अन्य सार्वजनिक वाहनों में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो पा रहा है. रोजाना ठाणे से दादर काम पर जाने वाले शैलेश यादव ने कहा कि घंटो लाइन लगाकर भी बेस्ट बस में सीट नहीं मिलती. खड़े होकर कष्टप्रद यात्रा करनी पड़ रही है, जबकि लोकल में खड़े होकर भी आराम से यात्रा होती थी.

हाईकोर्ट ने भी पूछा है सवाल

आम लोगों के लिए लोकल शुरू किए जाने के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने भी राज्य सरकार से पूछा है, परन्तु अब तक राज्य सरकार ने लोकल शुरू किए जाने को लेकर हाईकोर्ट को जवाब नहीं दिया है. हाईकोर्ट का भी कहना है कि जब सब कुछ धीरे-धीरे खोला जा रहा है, तो मुंबई लोकल को आम लोगों के लिए अनलॉक क्यों नहीं किया जा सकता.

लोकल पर राज्य सरकार लेगी निर्णय

आम लोगों के लिए लोकल चलाने को लेकर रेल प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय राज्य सरकार को लेना है. पिछले दिनों रेल मंत्री पीयूष गोयल ने भी कहा कि सभी के लिए लोकल चलाने को लेकर राज्य सरकार का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है.

टास्क फोर्स लोकल चलाने के पक्ष में नहीं

एक तरफ जहां जल्द लोकल शुरू किए जाने की मांग हो रही है, वहीं दूसरी तरफ राज्य सरकार द्वारा गठित कोविड-19 टास्क फोर्स फिलहाल मुंबई लोकल शुरू किए जाने के पक्ष में नहीं है. राज्य के पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे ने 15 अक्टूबर के बाद सभी के लिए लोकल ट्रेन शुरू करने का संकेत दिया था, परन्तु टास्क फोर्स का मानना है कि लोकल शुरू होने पर कोरोना संक्रमण मुंबई में बढ़ सकता है. टास्क फोर्स ने आशंका जताई है अगले कुछ दिनों में मुंबई में कोरोना मामलों में उतार-चढ़ाव हो सकता है. ऐसे में यदि लोकल शुरू हुई तो मामले बढ़ने की ज्यादा संभावना है. मुंबई लोकल में सोशल डिस्टेंसिंग, स्टेशनों पर अंदर-बाहर होने वाली भीड़ आदि मुद्दों पर राज्य सरकार को तैयारी करनी होगी. सभी के लिए मुंबई लोकल शुरू करने के पहले ऑफिसों के समय में भी बदलाव पर विचार किया जा रहा है. राज्य सरकार की गाइडलाइन में विभिन्न कार्यस्थलों पर कर्मचारियों की उपस्थिति 30 से 50 प्रतिशत तक करने का निर्देश है. लोकल न चलने से इसका असर आम कामकाजी लोगों पर पड़ रहा है.