स्ट्रोक की पहचान और समय पर इलाज बेहद जरूरी

  • 'वर्ल्ड स्ट्रोक डे' पर डॉक्टरों ने चेताया

मुंबई. ब्रेन स्ट्रोक (मस्तिष्क का दौरा) तब पड़ता है जब दिमाग के किसी भाग में खून का प्रवाह रुक जाता है. थक्का जमने या खून का दबाव बढ़ने के कारण रक्त वाहिका फटने से होता है. इससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी होने लगती हैं और वे नष्ट होने लगती हैं. इस कारण उस हिस्से का मस्तिष्क ढंग से काम करना बंद कर देता है. 

हर वर्ष लगभग 10 लाख लोगों को ब्रेन स्ट्रोक आता है. लक्षण की पहचान न होने और समय पर उपचार न मिलने के कारण व्यक्ति को लकवा मार देता है और उसके शरीर के अंग भी निष्क्रिय हो जाते हैं. ऐसे में गुरुवार को ‘वर्ल्ड स्ट्रोक डे’ के अवसर पर इंडियन स्ट्रोक एसोसिएशन ने एक पब्लिक वेबिनार का आयोजन किया था. इस वेबिनार का थीम 3 आर पर रखा गया था. 

रिकॉग्नाइज (बीमारी की पहचान), रिच हॉस्पिटल (अस्पताल पहुंचना), रिड्यूस डिसेबिलिटी ( शारीरिक क्षति को कम करना). स्ट्रोक के लक्षण, समय पर इलाज और रिकवरी को लेकर देश के जाने माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. निर्मल सूर्या, डॉ. वीजी प्रदीपकुमार, डॉ. विनीत सूरी, नीति आयोग के प्रो. विनोद पॉल और इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) के प्रमुख प्रो.बलराम भार्गव ने भी अपनी बात रखी.