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    मुंबई.  बैंक हड़ताल (Bank Strike) के दूसरे दिन भी महाराष्ट्र (Maharashtra) में बैंक सेवाओं पर असर दिखाई दिया। हड़ताल (Strike) के दूसरे दिन बैंक सेवाओं से जुड़े करीब 50 हजार कर्मचारी, अधिकारी हड़ताल पर रहे। बैंकों से नकदी निकालने, चेक क्लीयरेंस और दूसरे कार्यों पर असर देखा गया। सरकार की ओर से बैंकों के निजीकरण की घोषणा किए जाने के विरोध में कर्मचारियों और अधिकारियों की दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया गया था।

    सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की नौ यूनियनों के संयुक्त मंच ‘यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) के आह्वान पर यह हड़ताल की गई। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पिछले महीने आम बजट पेश करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के दो बैंकों के निजीकरण की घोषणा की है। यूनियनों का दावा है कि हड़ताल के पहले दिन 15 मार्च को करीब दो करोड़ चेक की क्लीयरेंस प्रभावित हुई हैं जिनमें 16,500 करोड़ रुपए तक भुगतान रुक गया। पहले दिन कई बैंकों के एटीएम में नकदी भी समाप्त हो चली थी।

    बैंकों का निजीकरण करना समस्या का हल नहीं

    अकेले मुंबई में ही करीब 86 लाख चेक और दूसरे उपकरणों को क्लीयर नहीं कर पाये जिसमें 6,500 करोड़ रुपये का भुगतान आगे नहीं हो पाया। आल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन(एआईबीईए) ने एक वक्तव्य में कहा है कि बैंकों का निजीकरण करना समस्या का हल नहीं है। यह विकासशील भारतीय अर्थव्यवस्था के लिहाज से नकारात्मक कदम है।