ST bus

    मुंबई. लॉकडाउन (Lockdown) के चलते  भारी आर्थिक नुकसान (Financial Loss) झेल चुकी एसटी (ST) अभी भी कोरोना (Corona) के जाल से नहीं उभर पा रही है। महाराष्ट्र (Maharashtra) की ‘लालपरी’ (Lalpari) कही जाने वाली एसटी की हालत अत्यधिक खराब हो गई है।

    आलम यह है कि एसटी का घाटा ‘दिन दूना, रात चौगुना’ बढ़ रहा है। बताया गया है कि पिछले लगभग 1 वर्ष में एसटी को 3 हजार 800  करोड़ से ज्यादा का नुकसान हुआ है।

    वेतन के लाले पड़े

    एसटी की कमाई लगभग आधी हो जाने से कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े हैं। लगभग 98 हजार कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिल पा रहा है। कोरोना काल में राज्य सरकार ने परिवहन निगम को लगभग 1,500 करोड़ की मदद की इसके बावजुद स्थिति नहीं संभल पाई। लॉकडाउन के पहले रोजाना 68 से 70 लाख यात्री एसटी से यात्रा करते थे। लॉकडाउन  के बाद अभी भी रोजाना 38 से 40 लाख लोग यात्रा कर रहें हैं।  यात्रियों की कम होती  संख्या, डीजल की बढ़ती कीमतें, टायर, बाधित तेल आपूर्ति, स्पेयर पार्ट्स की कमी,  पुरानी बसों  की संख्या, पूर्व कर्मचारियों की पेंशन, चिकित्सा भत्ता आदि खर्चों के चलते एसटी आर्थिक संकट में फंसी हुई है।

    फिर मदद की गुहार

    वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, ईंधन पर सालाना 3,000 करोड़ रुपए, टायर-रखरखाव और मरम्मत पर 600 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। टोल और सड़क कर के लिए भी एसटी को सालाना 160 करोड़ से अधिक भुगतान करना पड़ता है। पथकर और ईंधन कर से माफी की मांग भी काफी दिनों से की जा रही है। इस समय यात्री किराए से निगम को  प्रतिदिन औसतन 11 से 12 करोड़ रुपए की कमाई हो रही  है, जबकि  पिछले साल दैनिक आय  20 से 22 करोड़ थी। एसटी की खस्ता हालत को देखते हुए राज्य परिवहन निगम ने राज्य सरकार से और मदद की गुहार लगाई है।

    कामगारों में असंतोष

    एसटी की ख़राब आर्थिक हालत को देखते हुए हाल ही में घोषित ऐच्छिक सेवानिवृत्ति योजना को भी प्रतिसाद नहीं मिला। स्वेच्छानिवृति योजना को लेकर कामगार संगठनों में असंतोष दिख रहा है। मनसे एसटी कामगार सेना के नेता हरी माली ने कहा कि कोरोनाकाल में भी जीवन की बाजी लगाकर कम वेतन में कर्मचारियों ने काम किया है। वेतन करार भी कई वर्ष से नहीं हुआ। कामगार नेता हरी माली ने कहा कि एसटी का राज्य सरकार में विलिनीकरण होना चाहिए।