सीएम-राज्यपाल में टकराव का पुराना फसाना

मुंबई. महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी और मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के बीच इन दिनों मंदिरों को खोले जाने को लेकर टकराव शुरू है, लेकिन मुख्यमंत्री ठाकरे और राजभवन के रिश्तों में खटास की कहानी कई महीनों पहले शुरू हो गई थी. पिछले साल राज्यपाल कोश्यारी उस समय विवादों में आ गए थे, जब सरकार बनाने की चल रही जोड़-तोड़ के बीच उन्होंने अचानक एक दिन सुबह बीजेपी विधायक दल के नेता देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री और एनसीपी नेता अजीत पवार को उपमुख्यमंत्री की शपथ दिला दी. हालांकि यह सरकार अपना बहुमत साबित नहीं कर सकी और फडणवीस को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.        

ठाकरे को नहीं किया मनोनीत 

पिछले साल किसी सदन का सदस्य नहीं होने के बावजूद उद्धव ठाकरे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी. ऐसे में उन्हें अपनी कुर्सी को बचाए रखने के लिए 6 महीने के अंदर किसी भी सदन का सदस्य होना आवश्यक था. मार्च महीने में कोरोना महामारी की वजह से राज्य में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई. इस वजह से विधान परिषद की खाली सीटों पर होने वाले चुनाव को स्थगित करना पड़ा. ऐसे में कैबिनेट ने सीएम ठाकरे के शपथ लेने के 6 महीने पूरा होने से पहले उन्हें विधान परिषद के लिए मनोनीत करने का प्रस्ताव राज्यपाल कोश्यारी के पास भेजा, लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया. इस वजह से शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने राज्यपाल के खिलाफ जमकर हमला बोला था. बाद में मुख्यमंत्री ठाकरे ने इस बारे में पीएम नरेन्द्र मोदी से बात की और कोरोना महामारी के बीच विधान परिषद की खाली सीटों पर चुनाव कराए गए और सीएम अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे.

यूनिवर्सिटी परीक्षा को लेकर तनातनी

कोरोना महामारी की वजह से यूनिवर्सिटी परीक्षा को कैंसिल करने को लेकर भी सीएम ठाकरे और राज्यपाल कोश्यारी के बीच तनातनी देखने को मिली. राज्यपाल ने उनकी सहमति के बिना लिए गए इस फैसले को लेकर सीएम को पत्र लिखा. उन्होंने कहा कि बिना परीक्षा के डिग्री देने से छात्रों के करियर पर इसका असर पड़ सकता है.     

12 सदस्यों को मनोनीत करने का मामला लटका 

विधान परिषद की 12 खाली सीटों पर सदस्यों को मनोनीत किए जाने को लेकर भी सीएम ठाकरे और राज्यपाल के बीच विवाद है. राज्यपाल कोश्यारी ने कहा है कि उन्हें सरकार तरफ से कोई लिस्ट नहीं मिली है, जबकि सरकार का कहना है कि कोरोना महामारी की वजह से राज्यपाल ने फिलहाल कोई लिस्ट नहीं भेजने को कहा है.