ऑनलाइन में रौनक, ऑफलाइन ठंडा, व्यापारियों ने किया पुतला दहन

मुंबई. एक तो कोरोना की मार, दूसरे भारी छूट के साथ ई-कॉमर्स कंपनियों की ऑनलाइन सेल ने खुदरा दुकानदारों की हालत पतली कर दी है.  त्यौहारी सीजन में ऑनलाइन सेल से दुकानों पर ग्राहक कम दिख रहे हैं. विशेषकर मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक्स सामान, कपड़े और फुटवियर की रिटेल बिक्री पर ज्यादा असर पड़ रहा है. 

व्यापारिक महासंघ ‘कैट’ का कहना है कि ई-कॉमर्स कंपनियों का यह कदम भारत सरकार के एफडीआई नियमों का खुला उल्लघंन है. इसके विरोध में कैट और अन्य व्यापारी संगठनों ने अनैतिक ऑनलाइन व्यापार के खिलाफ दशहरे के पहले दिन विरोध प्रदर्शन और पुतला दहन का आव्हान किया था. इस अपील पर मुंबई में मस्जिद बंदर में व्यापारियों ने ऑनलाइन रूपी रावण के पुतले का दहन किया और ऑनलाइन कंपनियों के खिलाफ नारेबाजी की.

30% घटा रिटेल कारोबार

‘कैट’ के मुंबई अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि फ्लिपकार्ट और अमेजन की सेल से रिटेल कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है. ई-कॉमर्स कंपनियां अपने पैसे की ताकत पर भारी छूट देकर उपभोक्ताओं को आकर्षित कर रही है. साथ ही वे एफडीआई नियमों का खुला उल्लघंन कर रही हैं. इनकी सेल से रिटेल कारोबार करीब 30% घट गया है. इसलिए व्यापारियों को एकजुट होकर इन ऑनलाइन कंपनियों के खिलाफ अपनी मुहिम चलानी चाहिए और अनैतिक तरीके से किए जा रहे इनके व्यापार पर अंकुश लगाना चाहिए. अन्यथा भारत में बड़ी संख्या में व्यापारी बेरोजगार हो जाएंगे. हमारे देश की आबादी ज्यादा है और नौकरियों के अवसर ज्यादा ना होने से और नए लोग बेरोजगार होने पर देश की समूची व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो जाएगी.

लागत से कम पर बेचती ई-कॉमर्स कंपनियां

खाद्य व्यापार महासंघ के महामंत्री तरूण जैन ने कहा कि त्यौहारी सीजन में ई-कॉमर्स कंपनियां अपनी बंपर सेल के तहत सामानों को वास्तविक मूल्य से भी कम मूल्य पर बेच रही हैं. ये कंपनियां विभिन्न सामानों पर 10 से 80% तक छूट दे रही है. जबकि सामानों पर जीएसटी बिक्री मूल्य पर लिया जाता है. ऐसे में सरकारी खजाने पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा. अगर सामानों को वास्तविक मूल्य पर बेचा जाता है तो सरकारों को अधिक जीएसटी कलेक्शन होगा.

घाटे में, फिर भी बंपर छूट, जांच करे सरकार

बॉम्बे रिटेल ग्रेन डीलर्स एसोसिएशन के महामंत्री तनसुख गाला ने कहा कि पिछले कई सालों से घाटे में चल रही ये ई-कॉमर्स कंपनियां लगातार बंपर छूट दे रही है. सवाल उठता है कि घाटे में चल रही कोई कंपनी कैसे इतना छूट दे सकती है. यह जांच का विषय है. सरकार को इस बात का संज्ञान लेना चाहिए और जल्द से जल्द अनैतिक तरीके से हो रहे इस व्यापार को खत्म करने के लिए एक रेगुलेटरी अथॉरिटी बनानी चाहिए. जिससे इन ऑनलाइन कंपनियों पर नकेल कसी जा सके.