कृषि कानून को लागू करने वाला अध्यादेश रद्द, ठाकरे सरकार ने लिया निर्णय

मुंबई. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के दबाव में आखिरकार उद्धव ठाकरे नीत महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार के कृषि (पणन) कानून को लागू करने वाले अध्यादेश को रद्द कर दिया है. इसको लेकर सुबह से ही घमासान मचा हुआ था. कानून पर रोक लगाने के संदर्भ में कांग्रेस काफी आक्रामक थी. 

सूत्रों ने यहां तक बताया कि कांग्रेस की तरफ से अल्टीमेटम दिया गया था कि अध्यादेश को रद्द करने बाबत निर्णय नहीं लिया जाएगा, तो वह कैबिनेट की बैठक में अनुपस्थित रहेगी.  

अध्यादेश से हो रही दिक्कत 

किसानों की उपज खरीदने के संदर्भ में तैयार किए गए केंद्र सरकार के कानून को राज्य में क्रियान्वित किये जाने को लेकर महाविकास आघाड़ी सरकार की तरफ से अगस्त महीने में अध्यादेश जारी किया गया था. कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस की तरफ से घोषणा की गई थी कि राज्य में केंद्र सरकार का कृषि कानून नहीं लागू किया जायेगा, लेकिन अध्यादेश की वजह से सरकार को फ़ज़ीहत का सामना करना पड़ रहा था. केंद्र सरकार ने पिछले जून महीने में अध्यादेश जारी किया था, जिसे सभी राज्यों को भेज कर कृषि कानून लागू करने का निर्देश दिया गया था. अध्यादेश को रद्द करने बाबत विधायकों की राय ली गई.

सुनवाई में गिनाई गई खामियां 

सुनवाई के दौरान कहा गया कि कानून की वजह से बाजार समितियों के बाजार व्यवस्था में उहापोह की स्थिति उत्पन्न होगी. किसान, व्यापारी, दलाल, माथाडी, ठेका कर्मचारियों, सुरक्षा कर्मचारियों सभी वर्ग के लोगों पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा. कहा गया कि कुछ वर्ग के लोगों पर बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होगी. आमदनी के स्रोत कम होने पर किसानों के शोषण की संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता है, जिससे कानून के अनुपालन पर रोक को मान्य करते हुए आदेश जारी करने का निर्णय लिया गया.

नया कानून बनाया जाएगा

 अध्यादेश रद्द करने के संदर्भ में सहकारिता व विपणन मंत्री बालासाहेब पाटिल ने कहा कि यह केंद्र सरकार का कानून है. इस पर कानूनी सलाह ली गई थी, अभी भी इस पर चर्चा शुरु है. फिलहाल हमने अध्यादेश रद्द किया है. अध्ययन करके किसानों को राहत पहुंचाने वाला नया कानून बनाया जाएगा.