कोरोना संकट में ऑक्सीजन भी हुआ महंगा

  • कंपनियों ने बढ़ाए दोगुने दाम

मुंबई. कोरोना संकट के बीच दवा और मेडिकल सामान बनाने वाली कंपनियों पर सरकार कोई नियंत्रण नहीं रख पा रही है. एक तरफ अस्पताल मनमाना बिल वसूल रहे हैं वहीं दूसरी तरफ मेडिकल उपकरण बनाने वाली कंपनियों ने भी कोरोना वायरस के बढ़ते प्रवाह में अपने हाथ साफ करने शुरु कर दिए हैं. कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों को सांस लेने में कठिनाई होती है इसलिए सबसे पहले ऑक्सीजन की जरुरत होती है. अब ऑक्सीजन बनाने वाली कंपनियों ने ऑक्सीजन की दर बढ़ाकर दोगुनी कर दी है. जिसका खामियाजा कोरोना मरीजों को ही भुगतना पड़ रहा है. 

ऑक्सीजन की मांंग में बड़ा इजाफा 

कोरोना के बढ़ते संक्रमण के चलते इन दिनों मेडिकल ऑक्सीजन की मांंग में बड़ा इजाफा हुआ है. इसी का फायदा उठाकर मेडिकल ऑक्सीजन बनाने वाली सभी कपनियों ने ऑक्सीजन के  मूल्य पहले की अपेक्षा  दोगुना कर दिए हैं. पूरे देश में मेडिकल ऑक्सीजन बनाने वाली 26 कंपनियां हैं. इनमें से महाराष्ट्र राज्य में  4- 5 कंपनियां हैं. 

रोजाना 25000 सिलेंडर की आपूर्ति 

राज्य में 80 ऐसी कंपनियां हैं जो ऑक्सीजन बनाने वाली इन कंपनियों से टैंकर में ऑक्सीजन खरीद कर छोटे सिलेंडरों में भरकर अस्पतालों में सप्लाई देती हैं. महाराष्ट्र के अस्पतालों में  रोजाना 25000 सिलेंडर की आपूर्ति की जाती है. ऑक्सीजन निर्माता कंपनियां एक क्यूबिक मीटर गैस का पहले 20 रुपये कीमत वसूलती थीं, लेकिन कोरोना में ऑक्सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए कंपनियों ने प्रति क्यूबिक मीटर गैस के दाम में 15 रुपये का इजाफा कर दिया. कंपनियों से ऑक्सीजन लेने वाली रिफिलर कंपनियां अस्पतालों को 35 रुपये में बेचती थीं. निर्माता कंपनियों के दाम बढ़ा दिए जाने से अस्पतालों को 35 रुपये में पहुंचने वाली गैस अब 50-60 रुपये में पहुंच रही हैं. 20  मार्च तक प्रति क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन की कीमत 20  रुपये थी अब  उसकी कीमत दोगुने से भी अधिक हो गई है. अस्पतालों को सप्लाई किए जाने वाले छोटे सिलेंडर में 7 क्यूबिक मीटर और बड़े सिलेंडर में 210  क्यूबिक मीटर ऑक्सीजन आती है. छोटे सिलेंडर की कीमत पहले  225 रुपये और बड़ा सिलेंडर 6450 रुपये में मिल जाता था, अब इनके दाम दोगुने हो गए हैं. 

कैसे बनता है ऑक्सीजन

मेडिकल ऑक्सीजन पानी से बनता है. H2- O2 में   यानी पानी में मिश्रित ऑक्सीजन को प्रक्रिया करके अलग कर लिया है. 02 बचता है, उसी को मेडिकल ऑक्सीजन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. ऑक्सीजन की कालाबाजारी को रोकने के लिए राज्य सरकार कोई कदम नहीं उठा रही है. आल फूड एंड ड्रग लायसेंस होल्डर फाउंडेशन के अध्यक्ष अभय पांडे ने केंद सरकार और एफडीए कमिश्नर को पत्र लिख कर ऑक्सीजन की बढ़ी कीमतों तथा कालाबाजारी को नियंत्रित करने की मांग की है.