ऑनलाइन हुए पंडित, अब इंटरनेट से पूजा

– कुंडली मिलान, पाएं हर समस्या का समाधान

– स्मार्ट फोन से ग्रह शांति, नजर दोष, मुहूर्त का ज्ञान

– सोशल मीडिया से प्रचार, खाते में दक्षिणा की बहार

मुंबई. बहुत पुरानी कहावत है कि आवश्यकता ही अविष्कार की जननी होती है. वैश्विक महामारी कोरोना के कारण लगाए गए लॉक डाउन से कई महीनों से घर बैठे पंडितों ने समय के साथ चलने का फैसला करते हुए अब ऑनलाइन पूजा पाठ, कथा, अनुष्ठान करने का निर्णय लिया है. इसी के तहत अब ई-मेल आईडी के साथ फेसबुक, यू-ट्यूब, वेबसाइटों से अपने आप को जोड़ लिया है. 

अपना प्रचार करने के लिए फेसबुक, व्हाट्सएप, इंस्टाग्राम, ट्वीटर समेत सोशल मीडिया के अनेक प्लेटफार्मों का सहारा लेना शुरू कर दिया है. कई कर्मकांडी विद्वानों ने आईटी विशेषज्ञों के साथ मिलकर अपनी खुद की वेबसाइट बनाकर गूगल पर अपलोड कर दिया है, जहां वे देश के अनेक शहरों के साथ विदेशी यजमानों का मार्गदर्शन करते हुए उनके सवालों का समाधान शुल्क के साथ करते हैं. उनकी आवश्यकतानुसार पूजा और अनुष्ठान भी करते हैं.

कोरोना ने बदल दिया पूजा, अनुष्ठान का विधान

यहां सभी पूजा और अनुष्ठानों की लिस्ट उनकी दक्षिणा के साथ उपलब्ध रहती है. साथ ही बैंक खातों की डिटेल भी दी जाती है ताकि दक्षिणा सीधे उनके खाते में ऑन लाइन डाली जा सके. काफी विद्वान तो अन्य लोगों द्वारा बनाई गई ‘पंडित ऑन लाइन’ वेबसाइटों पर अपने आपको संबद्ध कर लिया है जहां कमीशन लेकर विद्वान पंडितों से पूजा, ग्रह शांति, मुहूर्त आदि की जानकारी उपलब्ध कराई जाती है. कुंडली मिलान हो, नवीन कुंडली का निर्माण हो, जीवन में सफलता असफलता, शादी विवाह, नौकरी, गृह निर्माण आदि के सवालों के जवाब भी निर्धारित शुल्कों पर दिए जाते हैं.

व्हाट्सएप और फेसबुक पर प्रचार

इसके अलावा बहुत से ऐसे कर्मकांडी ब्राह्मणों की संख्या है जो इंटरनेट चलाने का ज्ञान कम होने के कारण स्मार्ट फोन पर व्हाट्सएप और फेसबुक पर ही अपना प्रचार करते हैं. व्हाट्सएप पर यजमानों का ग्रुप बनाकर दैनिक राशिफल, पञ्चाङ्ग, मुहूर्त आदि की जानकारी पोस्ट करते रहते हैं. त्योहार, ग्रहण, एकादशी, अमावस्या, पूर्णिमा, प्रदोष काल आदि व्रतों की जानकारी भी उपलब्ध कराते रहते हैं. यही नहीं बड़ी संख्या में जानकर पंडित शिशुओं की नजर, टोना, झाड़फूंक आदि भी फोन पर करने लगे हैं. ऑनलाइन तरीका अपनाकर लॉकडाउन के इस काल में परिवार का पालन पोषण करना आसान बना रहे हैं.

ऑन लाइन पर ऐसी होती है पूजा, अनुष्ठान

कोरोना के वैश्विक संकट काल ने दुनिया में कई तरह की कार्य पद्धति (वर्क कल्चर) का अविष्कार किया है. इसी में ऑन लाइन पूजा और अनुष्ठान का भी समावेश है. अक्सर यजमान के घरों, दुकानों, कारखानों में प्रत्यक्ष उपस्थित रहकर यजमानों को निर्देश देकर फल, फूल, अक्षत, हल्दी कुंकुम देवताओं पर अर्पित कराने वाले पंडितजी अब मोबाइल के रीयर फ्रंट कैमरों से पूजा कराते हैं. इसका एक तरीका ऐसा होता है जिसमें पूजा सामग्री लेकर यजमान संबंधित पूजा के इष्ट के सामने घरों में बैठ जाते हैं. पंडितजी मोबाइल कैमरे से मंत्र बोलते हुए यजमान को यथास्थान पर फूल, फल, अक्षत, हल्दी, कुंकुम आदि रखने का निर्देश देते हैं. दूसरे तरीके में यजमान संकल्प लेकर हाथ जोड़कर कैमरे के सामने बैठ जाते हैं.पंडितजी पूजा सामग्री लेकर मंत्रोच्चार के साथ भगवान पर वस्तुओं को अर्पित करते हैं. दोनों तरीकों की अलग-अलग दक्षिणा तय होती है जो सीधे पंडितजी के खाते में ऑन लाइन ट्रांसफर कर दी जाती है.

पुरोहित और यजमान दोनों को सुविधा

कोरोना और लॉकडाउन ने मानव की मनमानी को सख्त संदेश दिया है. ऑनलाइन प्रयोग यजमान और पुरोहित, दोनों के लिए सुविधाजनक है. इसमें सोशल डिस्टेंसिंग की समस्या और संक्रमण का डर दोनों को नहीं रहता. -पं. रामप्रसाद मिश्र, भृगुसंहिताचार्य

ऑनलाइन से समस्या ‘गॉन’

ऑनलाइन और इंटरनेट का प्रयोग वर्तमान की आवश्यकता बन गई है. मंत्रोच्चार के शब्द यजमान के कानों में पड़ने चाहिए, चाहे वह पास से हो या दूर से. ऑनलाइन से यजमान और पंडित दोनों की समस्या का समाधान हो गया है. -पं. आशीष कुमार तिवारी, नालासोपारा

कुछ न कुछ विकल्प तो होना ही चाहिए

पूरे विश्व में ब्राह्मण वर्ग ही ऐसा है जो जन सामान्य के कल्याण की मंगल कामना करता है. लॉकडाउन से ऑनलाइन आना समय की जरूरत थी. आखिर कुछ न कुछ विकल्प तो अपनाना चाहिए था. और वह ईश्वर की कृपा से मिल गया. -पं. रविदत्त ओझा, बांद्रा

समय के साथ चलना ही प्रकृति है

जिस तरह से प्रकृति गर्मी, बरसात और सर्दी के चक्र के अनुसार परिवर्तित होती रहती है, मनुष्य को भी समय के साथ सार्थक परिवर्तन करना चाहिए. ऑनलाइन और इंटरनेट का प्रयोग आपके ज्ञान को वैश्विक आधार और पहचान देता है. -ज्योतिर्विद डॉ. बालकृष्ण मिश्र

8 साल पहले से हुआ ऑनलाइन

मानव जीवन के लिए कोरोना एक अभिशाप बनकर आई, लेकिन कई मायनों में यह वरदान साबित हुई है. प्रकृति, पर्यावरण और नदियों को नवजीवन दायिनी सिद्ध हुई है. 2008 में जब देश में स्मार्ट फोन युग का प्रादुर्भाव हो रहा था तभी मैंने कर्मकांड को विज्ञान से जोड़ दिया था. हिंदू पूजन डॉट कॉम से आज भी देश विदेश में पूजा की जा रही है. -पं. अरविंद पाठक