Met nawab malik, minister in maharashtra government at 5 pm today

  •  नवाब मलिक ने दी जानकारी
  • अल्पसंख्यक समाज का सरकारी सेवा में
  •  भागीदारी बढ़ाने की योजना

मुंबई. अल्पसंख्यक समाज की सरकारी नौकरियों में भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से चलाई जा रही युपीएससी स्पर्धा पूर्व प्रशिक्षण योजना अंतर्गत प्रशिक्षणार्थी छात्रों की छात्रवृत्ति प्रति माह 2 हजार रुपए से बढ़ाकर 4 हजार रुपए किए जाने की जानकारी कौशल विकास एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री नवाब मलिक ने दी है.

अल्पसंख्यक मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध, जैन, सिख, पारसी समाज की सरकारी सेवा में भागीदारी बढ़ सके, इसके लिए केंद्रीय लोक सेवा आयोग की (युपीएससी) स्पर्धा परीक्षा की तैयारी के लिए अल्पसंख्यक समाज के चयनित, होनहार छात्रों को इस योजना के अंतर्गत प्रशिक्षण दिया जाता है. राज्य प्रशासकीय संस्था के मुंबई, कोल्हापुर, नागपुर और औरंगाबाद स्थित प्रशिक्षण केंद्र में प्रति केंद्र 10 छात्रों को यह प्रशिक्षण दिया जाता है. इन छात्रों को वर्तमान में प्रति माह 2 हजार रुपए छात्रवृत्ति दी जाती है तथा उच्च व प्रोद्योगिकी शिक्षा विभाग के जरिये चलायी जा रही नागरी सेवा पूर्व परीक्षा प्रशिक्षण योजना के अंतर्गत छात्रों के छात्रवृत्ति प्रति माह 2 हजार रुपये से बढ़ाकर 4 हजार रुपए की गई है.

बढ़ोत्तरी 2020-21 शैक्षणिक वर्ष से लागू की जा रही

 उन्होंने बताया कि यह बढ़ोत्तरी 2020-21 शैक्षणिक वर्ष से लागू की जा रही है.मुंबई के राज्य प्रशासकीय व्यवसाय शिक्षण संस्था और  नागपुर, औरंगाबाद और कोल्हापुर स्थित भारतीय प्रशासकीय सेवा पूर्व प्रशिक्षण केंद्र में छात्रों को युपीएससी की तैयारी के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है. अल्पसंख्यक समाज के होनहार छात्रों से इस योजना का लाभ लेने का आह्वान मंत्री मलिक ने किया है.

आईएफएडी के लोन चुकाने की अवधि बढ़ेगी 

इस बीच, महाराष्ट्र सरकार ने एक अहम फैसला लेते हुए नव तेजस्विनी-महाराष्ट्र ग्रामीण महिला उद्यम विकास परियोजना के कार्यान्वयन के लिए अन्तरराष्ट्रीय कृषि विकास फंड (आईएफएडी) से लिए गए कर्ज को वापस करने की समय – सीमा को बढ़ाने का फैसला लिया है. 5 साल के लिए 1.25 % व्याज दर व 0.75% सेवा शुल्क‍ पर लिए गए कर्ज को वापस करने की  अवधि को 5 साल से बढ़ा कर 20 साल कर दिया गया है. मुख्यमंत्री  उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस बात का फैसला लिया गया. साल 2018 में   तत्कालीन सरकार ने 6 साल के नव तेजस्विनी-महाराष्ट्र ग्रामीण महिला उद्यम विकास परियोजना को लांच किया था. जिसके लिए  528.55  करोड़ के फंड को मंजूर किया गया था. ग्रामीण महिलाओं के लिए महिला आर्थिक विकास निगम (डब्लूईडीसी ) और आईएफएडी ने इस प्रस्ताव का मसौदा तैयार किया था, जिसमें आईएफएडी ने  कुल  51.40 मिलियन डॉलर की राशि मंजूर की थी,  जिसमें 38.0 मिलियन डॉलर की रकम बाकी है, जबकि 12.0 मिलियन डॉलर की  राशि प्रोजेक्ट के दौरान दी जाएगी. वहीं आईएफएडी की ओर से 1.40 मिलियन डॉलर की राशि ग्रांट के रूप में मिलेगी. प्रोजेक्ट की कुल लागत 80.60 मिलियन डॉलर यानी 523 करोड़ रुपए है.  इस प्रोजेक्ट में सरकार का हिस्सा 29.20 मिलियन डॉलर होगा. यानी आईएफएडी  का  हिस्सा 334.10 करोड़ रुपए और महाराष्ट्र सरकार का हिस्सा 188.88 करोड़ रुपए होगा.