BMC allows opening of electronic and hardware shops of the locality

मुंबई. पिछले 7 महीने बाद होनेवाली बीएमसी की स्थायी समिति की बैठक में 600 प्रस्ताव लाकर  बीएमसी नया कीर्तिमान स्थापित करने जा रही है. आगामी बैठक में 900 करोड़ रुपये का वारा न्यारा  हो सकता है. एक साथ इतने प्रस्ताव लाने का  विरोध शुरु हो गया है. भाजपा ने आरोप लगाया है कि शिवसेना एक बैठक में 600 प्रस्ताव पास कराना चाहती है. बीजेपी का कहना है कि बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार करने के लिए ही इतने प्रस्ताव लाए जा रहे हैं. कार्यक्रम पत्रिका में बीजेपी के प्रस्ताव को शामिल न करने का भी आरोप लग रहा है. 

शिंदे ने जाधव को लिखे पत्र में कहा है कि अप्रैल 2020 के बाद स्थायी समिति की बैठक नहीं हुई है. 6 महीने से अधिक समय के अंतराल के बाद होनेवाली बैठक में बीएमसी सचिव के पास 550 से 600 विषय प्राप्त हुए हैं. जो एक ही स्थायी समिति की बैठक के कार्यक्रम पत्रिका में शामिल किया गया है. एक सभा में 600 प्रस्तावों का अध्ययन कर कामकाज को लेकर सार्थक चर्चा नहीं हो सकती है. एक सभा में अधिक से अधिक 50 से 60 प्रस्ताव लाया जाए और स्थायी समिति की बैठक सप्ताह में 2 या 3 बार बुलाने मांग शिंदे ने की है.

90% प्रस्ताव कोविड पर किए गए खर्च के 

600 प्रस्ताव में से 90 प्रतिशत प्रस्ताव कोरोना काल में खर्च किए गए कार्यों के हैं. बीएमसी प्रशासन ने आपातकालीन उपयोग के काम  में अपने स्तर पर मंजूर किया है. जिसका स्थायी समिति से अनुमति लेना अनिवार्य होता है. पिछले 7 महीने में होने वाली लगभग 28 बैठकों का प्रस्ताव एक साथ लाया जा रहा है. इतनी जल्दबाजी में  प्रस्ताव लाया जा रहा है, उसके अध्ययन के लिए  सदस्यों को समय नहीं मिलेगा. कोरोना संकट के कारण कोविड से संबंधित सामान, उपकरण, दवा और अन्य सामानों की खरीददारी में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है. ऐसी आशंका हर स्तर पर व्यक्त की जा रही है. सामानों की खरीददारी में भ्रष्टाचार की आशंका को लेकर भाजपा ने कई पत्र दिए हैं आंदोलन किया है. जिसमें से एक भी पत्र का जवाब हमें नहीं मिला है. इस बारे में हमने प्रशासन के साथ पत्र व्यवहार कर सभी खरेददारी के संबंध में सविस्तार जानकारी उपलब्ध कराने का प्रस्ताव स्थायी समिति में कार्योत्तर मंजूरी के लिए पेश किया है. 

कार्यपद्धति की परंपरा का उल्लंघन

एक निश्चित योजना के तहत कार्यक्रम पत्रिका में बड़ा बदलाव कर दिया गया. यह बहुत ही गंभीर मामला है, यह कार्यपद्धति की परंपरा का उल्लंघन है. शिंदे ने कहा कि मलाईदार प्रस्तावों को प्राथमिकता देना भ्रष्टाचार की कई आशंकाएं पैदा कर रहा है. शिंदे ने आरोप लगाया कि अब तो विरोधी पक्ष नेता भी सत्ताधारी पार्टी से मिल चुके हैं. वे उनकी हां में हां मिला कर चल रहे हैं. फिर बड़े स्तर पर होने वाले भ्रष्टाचार को कौन उठाएगा. 

एक बैठक में 50 प्रस्ताव लाए जाते थे. 7 महीने से एक भी बैठक नहीं हुई है. कोरोना से निपटने में जो रकम खर्च की जा चुकी है अधिकांश प्रस्ताव उससे संबंधित है. बीजेपी अकारण आरोप लगा रही है.  -रवि राजा, विरोधी पक्ष नेता (बीएमसी)