कोरोना काल में आस्था की रथयात्रा

– प्रतीकात्मक रूप से घूमी जगन्नाथ की सवारी

– सिर्फ पुजारियों ने खींची पवित्र रथ की रस्सी

– 40 हजार श्रद्धालुओं ने किया ऑनलाइन दर्शन

– मीरारोड के इस्कॉन मंदिर का आयोजन

– साकीनाका में पहली बार नहीं निकली रथयात्रा

मुंबई. आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि पर निकलने वाली भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा इस वर्ष मुंबई में कोरोना की भेंट चढ़ गई. लॉकडाउन और सोशल डिस्टेंसिंग के चलते उड़ीसा के जगन्नाथपुरी में होने वाली ऐतिहासिक रथयात्रा भी इस वर्ष सीमित कर दी गई. मुंबई में इस्कॉन द्वारा संचालित मीरा रोड पूर्व के श्री श्री राधा गिरधारी मंदिर समिति एवं साकीनाका स्थित श्री जगन्नाथ सेवा मंडल मुंबई के तत्वावधान में हर वर्ष इसी तिथि पर भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा धूमधाम से निकलती थी. 

इस रथयात्रा में उड़ीसा की तर्ज पर दोपहर से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की प्रतिमा को स्थापित कर रथों को खींचा जाता था. लेकिन साकीनाका में पिछले 32 सालों से लगातार उड़िया समाज द्वारा आयोजित होने वाली रथयात्रा पहली बार स्थगित करनी पड़ी.जबकि मीरा रोड में प्रतीकात्मक रूप से मंदिर परिसर में ही सूक्ष्म रथयात्रा निकाली गई जिसमें सिर्फ मंदिर के पुजारी और मंदिर परिसर में रहने वाले स्वयंसेवक ही शामिल हुए.

सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रथयात्रा निकाली

इस्कॉन मंदिर के प्रमुख स्वामी कमल लोचन महाराज ने बताया कि इस वर्ष वैश्विक महामारी कोरोना के चलते हमने रथयात्रा के वृहत स्वरूप को स्थगित कर सिर्फ प्रतीक के रूप में परंपराओं का निर्वहन करने के लिए सोशल डिस्टेंसिंग के साथ रथयात्रा निकाली. इसमें सिर्फ पुजारियों ने ही रस्सी खींच में भाग लिया. हमने इस्कॉन के श्रद्धालुओं के लिए ऑनलाइन दर्शन की व्यवस्था की थी जिसमें फेसबुक तथा यू-ट्यूब पर लाइव प्रसारण किया जिसमें 40 हजार से अधिक भक्तों ने रथयात्रा का दर्शन किया. हर वर्ष इसके लिए एक दिन पूर्व भक्तों की मंडली ‘हरे कृष्ण, हरे राम’ की धुन पर नाचते गाते रथयात्रा मार्ग की सफाई करती थी. इसमें मुंबई और ठाणे से श्रद्धालु शामिल होते थे.

 रथयात्रा को स्थगित करने का फैसला

इसी तरह से श्री जगन्नाथ सेवा मंडल द्वारा साकीनाका पाईप लाईन के सत्यनगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से रथयात्रा निकालकर परिसर के विभिन्न मार्गों से भ्रमण कराया जाता था जो श्री गुंडीचा (मौसीमां) मंदिर जाकर समाप्त होती थी. यहां एक हप्ते तक विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम और भजन कीर्तन आयोजित होते थे. आठ दिन बाद फिर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र, सुभद्रा के साथ मंदिर वापस आते थे. मंडल ने जनहित और कोरोना को ध्यान में रखते हुए पहली बार रथयात्रा को स्थगित करने का फैसला किया. मंडल के राधेश्याम पाणिग्रही, रमेशचंद्र मुनि और सुदाम साहु के संयोजन में होने वाली इस रथयात्रा में मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण से दर्शन के लिए आते थे.