Shiv Sena
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  • महाराष्ट्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नेताओं के भरोसे चुनावी समर की तैयारी

मुंबई. अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की संदिग्ध मौत के बाद महाराष्ट्र अस्मिता का झंडाबरदार होने का दावा करने वाली शिवसेना ने बिहार विधानसभा के चुनावी समर में कूदने का ऐलान तो कर दिया है पर पार्टी के सामने दिक्क्त यह है कि इसके पास बिहार प्रदेश के नेताओं का अभाव है और इसके लिए महाराष्ट्र और पूर्वी उत्तर प्रदेश के नेताओं के भरोसे है. पार्टी ने बिहार विधानसभा की 243 में से 50 सीटों पर उम्मीदवार उतारने का फैसला किया है, पर खुद पार्टी से जुड़े सूत्र बताते हैं कि 50 बिहारी प्रत्याशी को खोजना पार्टी के लिए टेढ़ी खीर साबित हो रहा है.

शिवसेना में बिहार के नेताओं का टोटा है. पार्टी के लोगों का कहना है कि पूर्व सांसद संजय निरुपम के साथ ही बिहारी नेताओं ने पार्टी को जय महाराष्ट्र कह दिया था. शिवसेना  महाराष्ट्र के मंत्रियों, सांसदों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंद लोगों के भरोसे चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है.

साल 2015 में भी लड़ा था चुनाव 

शिवसेना पहली बार बिहार विधान सभा का चुनाव नहीं लड़ रही है. इसके पहले पार्टी 2015 के चुनाव मैदान में उतरी थी और पार्टी के उम्मीदवारों ने 2 लाख से अधिक वोट बटोरे थे. हालांकि अधिकतर उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई थी. हालांकि उस चुनाव में और इस चुनाव में काफी अंतर है. वर्ष 2014 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भाजपा और शिवसेना का गठबंधन टूट गया था, लेकिन चुनाव बाद भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद वह बिहार में बीजेपी के खिलाफ उतरी थी. इस बार स्थिति अलग है. महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में शिवसेना ने भाजपा के साथ गठजोड़ कर चुनाव में जीत हासिल की लेकिन कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी से समझौता कर सरकार बना ली. बिहार में शिवसेना को सहयोगी दल कांग्रेस और एनसीपी के साथ ही प्रमुख विरोधी दल भाजपा से एक साथ मुकाबला करना होगा. अभिनेता सुशांत मामले में बिहार के लोगों की भावनाएं काफी आहत हुई हैं. दूसरी बात, इस बार बिहार में मुकाबला त्रिकोणीय होने वाला है और ऐसे में यहां बाहरियों के लिए कोई जगह नहीं है.

यूपी के नेता स्टार प्रचारकों की लिस्ट में 

शिवसेना की तरफ से चुनाव आयोग को स्टार प्रचारकों की जो लिस्ट दी गई है, उनमें मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, उनके मंत्री पुत्र आदित्य ठाकरे, पार्टी प्रवक्ता संजय राउत, मंत्री सुभाष देसाई, सांसद अनिल देसाई, विनायक राउत, अरविंद सावंत, प्रियंका चतुर्वेदी, राहुल शेवाले और कृपाल तुमाने के अलावा पूर्वी उत्तर प्रदेश अंतर्गत जौनपुर, भदोही और प्रतापगढ़ जिले के 4 लोगों का नाम शामिल है. हालांकि शिवसेना के हिंदी भाषी स्टार प्रचारक चुनाव को लेकर अधिक उत्साहित हैं.

बिहार से बचपन का नाता

बिहार से बचपन का नाता है. एन एम जोशी, जॉर्ज फर्नांडिस के साथ बिहार में चुनाव का काम किया है. मज़दूरों की लड़ाई लड़ने की वजह से बिहार के लोगों से अच्छे संबंध हैं. इसका फायदा मिलेगा. – सुनील चिटणीस, स्टार प्रचारक, मजदूर नेता

इस बार होगा बेहतर प्रदर्शन

बिहार चुनाव में इस बार पार्टी बेहतर प्रदर्शन करेगी. वर्ष 2015 में हुए चुनाव के बाद से पार्टी नेताओं का बिहार के लोगों से संपर्क बढ़ा है.पार्टी बहुत ही मजबूती के साथ चुनाव मैदान में उतर रही है. -विनय शुक्ल, स्टार प्रचारक, राष्ट्रीय संगठक

खुलेगा पार्टी का खाता

बिहार चुनाव में इस बार पार्टी का खाता खुलेगा. शिवसेना पूरी ताकत से चुनाव मैदान में उतर रही है. पार्टी नेताओं ने चुनावी रणनीति तैयार की है. जिसका फायदा मिलेगा. – अखिलेश तिवारी, स्टार प्रचारक, राष्ट्रीय संगठक

बिहार के लोगों का शिवसेना पर भरोसा

बिहार के लोगों का शिवसेना पर भरोसा बढ़ा है. सुशांत सिंह मामले को मुद्दा बनाने का प्रयास किया गया, लेकिन अब सच्चाई सामने आ गई है. मुंबई सहित पूरे महाराष्ट्र में जीवन यापन करने वालों की पहली पसंद शिवसेना है. मुंबई के लोग बिहार में शिवसेना के लिए वोट मांग रहे हैं. -अशोक तिवारी, स्टार प्रचारक, राष्ट्रीय संगठक

शिवसेना हिंदीभाषियों की हितैषी

शिवसेना हिंदीभाषियों की हितैषी है. मुंबई, ठाणे सहित अन्य इलाकों में रहने वाले बिहार और उत्तर प्रदेश के लोगों को जब भी किसी तरह की दिक्कत होती है. शिवसेना आगे आती है. बिहार में पार्टी का प्रचार कर मतदाताओं को आकर्षित किया जाएगा. -गुलाब दुबे, स्टार प्रचारक, राष्ट्रीय संगठक

शिवसेना के “शेर” को मिला “बिस्कुट”

उधर, बिहार विधान सभा चुनाव में किस्मत आजमाने वाले शिवसेना पार्टी के उम्मीदवारों को चुनाव आयोग ने बिस्कुट चुनाव चिन्ह आवंटित किया है, जिस पर शिवसेना ने आपत्ति जताई है. बिहार में सत्तारुढ़ दल जदयू और शिवसेना के चुनाव चिन्ह मिलते जुलते होने के कारण जदयू ने शिवसेना के चुनाव चिन्ह पर आपत्ति जताई थी. जिसके बाद शिवसेना और  झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) का चुनाव चिन्ह वापस ले लिया गया था. शिवसेना और जेएमएम का चुनाव चिन्ह तीर धनुष है. जबकि जदयू का चुनाव चिन्ह तीर है. बिहार चुनाव में अपने बलबूते 50 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा करने वाली शिवसेना ने तीर धनुष के स्थान पर ट्रैक्टर चलाता किसान, गैस सिलेंडर या बैट में से एक चुनाव चिन्ह आवंटित करने की मांग चुनाव आयोग से की थी. लेकिन चुनाव आयोग ने इन तीनों को छोड़ बिस्कुट चुनाव चिन्ह दिया है, जिस पर शिवसेना की तरफ से आपत्ति जताई गई है.