स्कूल फीस की समस्या का करो समाधान

  • सीएम और स्कूली शिक्षा मंत्री से लगाई गुहार 

सूरज पांडेय

मुंबई. आर्थिक तंगी से जूझ रहे अभिभावकों के लिए स्कूल और कॉलेजों की फीस सबसे बड़ी समस्या बन गई है. कई गरीब बच्चों की मार्च से ही फीस बकाया है, जिसे भरने में उनके परिजन असमर्थ हैं. ऐसे में फीस सेटलमेंट की मांग को लेकर कुछ अभिभावक मंत्रालय में मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और स्कूली शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ से मिलकर फीस में रियायत की मांग की.

कोरोना के कारण मुंबई में काफी लोगों की नौकरी चली गई तो कइयों की सैलरी में कटौती की गई है. ऐसे में परिवार चला रहे व्यक्ति के लिए रोजमर्रा की जरूरतों के साथ-साथ बच्चों की फीस की भी चिंता सता रही है. वैसे तो स्कूल द्वारा तत्काल फीस भरने को लेकर जबरदस्ती नहीं की जा रही है, लेकिन स्कूल द्वारा अभिभावकों को भेजे जा रहे रिमाइंडर और फीस की बढ़ती राशि मानसिक तनाव बढ़ा रही हैं. मुंबई कांग्रेस माइनॉरिटी सेल के जनरल सेक्रेटरी और अभिभावक अब्बास मोहम्मद ने बताया कि कोरोना महामारी के चलते हुए लॉकडाउन के कारण गरीब परिवार काफी प्रभावित हुए हैंं. आज आम आदमी अपने परिवार को दो वक्त को रोटी देने के लिए खून पसीना एक कर रहा है.

कइयों की नौकरी चली गई

एक ओर कइयों की नौकरी चली गई है तो दूसरी ओर पैसों की तंगी में कहीं बच्चों की शिक्षा न छूट जाए यह टेंशन बना हुआ है. मौजूदा परिस्थिति कब सुधरेगी इसका भी कोई पता नहीं. ऐसे में मैं और कुछ अभिभवाक मंत्रालय में सीएम उद्धव ठाकरे और शिक्षा मंत्री वर्षा गायकवाड़ के पास यह मांग ले के पहुंचे कि गरीब अभिभावकों की मदद के लिए सरकार आगे आए और बकाया फीस में से 50 प्रतिशत राशि कम कर गरीब अभिभावकों को राहत दी जाए. शिक्षा मंत्री के कार्यालय ने पत्र स्वीकार किया है अब आगे देखना है कि क्या कोई राहत मिलती है या नहीं.

स्कूल भेज रहे हैंं रिमाइंडर

बकाया फीस को लेकर मुंबई के कई स्कूलों ने अभिभावकों को रिमाइंडर भेजना शुरू कर दिया है. हाल ही में कांग्रेस नेता संजय निरुपम ने भी ट्वीट कर कई स्कूलों के रिमाइंडर पोस्ट किए थे और सरकार को तमाशबीन बताया.

टीचर्स की सैलरी में कटौती

पेरेंट्स- टीचर्स एसोसिएशन की अध्यक्ष अरुंधति चवान ने कहा कि हमारे पास कई शिक्षकों को शिकायतें आ रही है कि उन्हें कम सैलरी मिल रही है.स्कूल प्रशासन कह रहे हैंं कि उन्हें फीस नहीं मिल रही है. ऐसे में स्कूल फीस कैसे माफ करेंगे? ऐसा हुआ तो शिक्षकों की सैलरी कौन देगा.बहुत कम ही ऐसे स्कूल हैं जिनके पास पैसे हैं ,ज्यादातर स्कूल मैनजमेंट के पास पैसे नहीं है.यदि सरकार अपनी ओर से राहत राशि देती है तो स्कूल प्रशासन को किस बात की दिक्कत होगी.